India Bangladesh News: PM मोदी को शेख हसीना ने गिफ्ट की वो किताब, जिसे देख पाकिस्तान को लगी होगी मिर्ची

 
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वो तारीख थी 7 मार्च 1971, बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान जनसभा को संबोधित कर रहे थे लेकिन पाकिस्तान सरकार ने उसके लाइव प्रसारण की अनुमति नहीं दी। रेडियो पर भी भाषण बैन कर दिया गया। इसके बाद अगले कुछ दिनों में ही 25 मार्च से ऐसा निर्णायक आंदोलन छिड़ा कि साल बीतते-बीतते दुनिया के नक्शे पर बांग्लादेश जन्म ले चुका था।

नई दिल्ली। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत आई हुई हैं। आज राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। दोनों के बीच बातचीत के बाद सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान कुछ ऐसा भी हुआ जिसे देख पड़ोसी पाकिस्तान को काफी मिर्ची लगी होगी। दिल्ली में आज शेख हसीना ने प्रधानमंत्री मोदी को बांग्लादेश के जनक शेख मुजीबुर्रहमान के ऐतिहासिक भाषण का भारतीय भाषाओं में अनुवाद सौंपा। मुजीब ने 7 मार्च 1971 को यह ऐतिहासिक भाषण दिया था। सरकारें बदल गईं, दशक बीत गए लेकिन पाकिस्तान की वो टीस तो बरकरार है। 1971 में भारत ने उसे कुछ ऐसा सबक सिखाया था, जो पाकिस्तान की आने वाली पीढ़ियां चाहकर भी नहीं भुला पाएंगी। 6 सितंबर, आज तारीख भी ऐसी जब पाकिस्तान अपने सैनिकों की शहादत को याद कर रहा है। जी हां, 1965 की लड़ाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था। जिक्र हुआ है तो यह समझना भी जरूरी है पाकिस्तान को वह भाषण आज भी क्यों खटकता है?

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बिना स्क्रिप्ट बंगबंधु ने दिया भाषण
1971 के मुक्ति संग्राम का नेतृत्व शेख मुजीबुर्रहमान ने किया था। यह वह दौर था जब पाकिस्तान के सैन्य शासकों ने बांग्ला राष्ट्रवादी नेता बंगबंधु मुजीब को सत्ता हस्तांतरित करने से मना कर दिया था। जबकि उनकी पार्टी आवामी लीग को 1970 में हुए आम चुनाव में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में बहुमत मिला था। 7 मार्च की इस स्पीच ने प्रभावी ढंग से बांग्लादेश की आजादी की घोषणा कर दी। इस भाषण में खुलकर कहा गया था कि कैसे औपनिवेशिक शासन के बाद देश समावेशी, लोकतांत्रिक समाज को विकसित करने में नाकाम रहा और अलग जातीय, सांस्कृतिक, भाषायी या धार्मिक समूहों से भेदभाव हुआ। यह भाषण असाधारण था। गौर करने वाली बात यह थी कि इसके लिए कोई स्क्रिप्ट नहीं लिखी गई थी।

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करीब 20 मिनट के संबोधन में ऐसा क्या था कि बांग्लादेश से पाकिस्तानी सेना के पैर उखड़ने की शुरुआत हो गई? दरअसल, इस संबोधन के अगले कुछ दिनों के भीतर ही मार्च 1971 में मुक्ति संग्राम की शुरुआत हो गई थी और आखिर में 16 दिसंबर को भारत के आगे पाकिस्तानी सेना ने घुटने टेक दिए और मानचित्र पर नया देश बांग्लादेश अस्तित्व में आया। 

पढ़िए 7 मार्च को मुजीब के भाषण के कुछ अंश-

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मेरे प्यारे भाइयो, आप सभी जानते हैं कि हमने कितनी मुश्किलें देखी हैं। लेकिन दुख की बात है कि ढाका, चटगांव, खुलना, रंगपुर और राजशाही की सड़कें आज मेरे भाइयों के खून से लथपथ हैं और जो पुकार हम बंगाली लोगों की सुन रहे हैं वह आजादी की पुकार है, अस्तित्व की पुकार है, हमारे अधिकारों की पुकार है।

आपने आवामी लीग को जीत दिलाई जिससे एक संवैधानिक सरकार को बहाल होते देख सकें। उम्मीद थी कि नेशनल असेंबली में बैठे प्रतिनिधि एक ऐसा संविधान तैयार करेंगे जो लोगों को उनकी आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक बंधनों से मुक्त करेगा। लेकिन अब बड़े दुख के साथ, मैं हमारे पिछले 23 वर्षों के इतिहास को देखता हूं और मुझे बंगाली लोगों के रक्तपात के इतिहास के अलावा कुछ नहीं दिखता। हमारा इतिहास लगातार मातम, रक्तपात और निर्दोष आंसुओं का रहा है।

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हमारा खून 1952 में बहा, 1954 में हमें जनादेश मिला। लेकिन हमें फिर भी देश की बागडोर संभालने का मौका नहीं दिया गया। 1958 में अयूब खान ने हमारे लोगों पर मार्शल लॉ लगा दिया और अगले 10 वर्षों के लिए हमें गुलाम बना लिया। 1966 में जनता के छह सूत्री आंदोलन के दौरान कई युवक और युवतियों का खून बहा।.....

मैंने याह्या खान से कहा कि आप अपने ही भाइयों पर बंदूकें कैसे तान सकते हैं? बाद में याह्या खान ने राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस के लिए सहमति जताई लेकिन मैं बता दूं कि यह सच नहीं है।

मैंने कहा था कि मिस्टर याह्या खान आप इस देश के राष्ट्रपति हैं। ढाका आइए और देखिए हमारे गरीब बंगाली लोगों को आपकी गोलियों ने खामोश कर दिया है, कैसे हमारी माताओं की गोद सूनी हो गई, बहनों को लूटा गया, कैसे मेरे बेबस लोगों का नरसंहार हुआ। मैंने कहा, खुद आकर देखिए और फिर जज की तरह फैसला कीजिए। मैंने उनसे यही कहा था।...

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मैं अब सभी अदालतों, कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को अनिश्चित काल के लिए बंद करने की घोषणा करता हूं। कोई भी अपने कार्यालयों को रिपोर्ट नहीं करेगा- यही मेरा आपसे आग्रह है।

गरीबों को कोई असुविधा न हो इसलिए सशस्त्र बलों की किसी जरूरत को पूरा करने के अलावा रिक्शा, ट्रेन और अन्य परिवहन सामान्य रूप से चलेंगे। अगर सेना इसका सम्मान नहीं करती है तो उसका नतीजा क्या होगा, मैं उसका जिम्मेदार नहीं हूंगा।

सचिवालय, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, जजों के कोर्ट और सरकार, अर्ध-सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। व्यापारिक लेनदेन के लिए केवल बैंक रोज दो घंटे खुल सकते हैं। लेकिन पूर्वी पाकिस्तान से पश्चिम पाकिस्तान कोई पैसा नहीं भेजा जाएगा। बंगाली लोग इस दौरान शांत बने रहेंगे। टेलिग्राफ और टेलिफोन संचार बांग्लादेश के भीतर ही सीमित रहेगा।....

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आपके पास जो कुछ भी थोड़ा सा है, आगे के संघर्ष के लिए आपको अभी से तैयारी करनी चाहिए।

हमने खून दिया है, हम और भी देंगे। लेकिन इंशाअल्लाह, हम इस देश के लोगों को आजाद कराएंगे।

इस बार का संघर्ष मुक्ति के लिए है। इस बार का संघर्ष आजादी के लिए है।

तैयार रहो। आंदोलन और संघर्ष को जिंदा रखना होगा। अनुशासित रहें। अनुशासन के बिना किसी भी राष्ट्र का आंदोलन विजयी नहीं हो सकता।

जय बांग्ला।

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