Gyanvapi Mosque Case: मुस्लिम पक्ष की याचिका क्‍यों हुई खारिज? समझिए पूरी बात

 
Gyanvapi Mosque Case

पूर्व कैबिनेट मंत्री और कानून के पहलुओं को बारीकी से समझने वाले सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने ज्ञानवापी मामले में प्रतिक्रिया दी है। उन्‍होंने समझाया है सोमवार को कोर्ट के दिए गए फैसले का क्‍या मतलब है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज की तो इसका कारण क्‍या था। मुस्लिम पक्ष क्‍या चाहता था।

नई दिल्‍ली। ज्ञानवापी मस्जिद मामले (Gyanvapi Mosque Case) में मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज हो गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और जाने-माने वकील डॉ सुब्रमण्‍यम स्‍वामी (Subramanian Swamy) ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्‍होंने बताया कि मुस्लिम पक्ष की याचिका क्‍या थी और उसे क्‍यों जिला अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा है कि हिंदू पक्ष की याचिका मानने योग्‍य है। वाराणसी की जिला अदालत ने सोमवार को ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले की मेनटेनबिल‍िटी पर सवाल उठाने वाली याचिका खारिज कर दी। सुब्रमण्‍यम स्‍वामी मानते हैं क‍ि कोर्ट का फैसला ब‍िल्‍कुल सही है।

सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने बताया कि मुस्लिम पक्ष ने याचिका दाखिल की थी। यह सिविल प्रोसीजर कोड के तहत दर्ज की गई थी। ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत इसे दाखिल किया गया था। इसमें ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा करने की इच्‍छा रखने वाली महिलाओं की याचिका को खारिज करने के लिए कहा गया था। मुस्लिम पक्ष चाहता था कि महिलाओं की याचिका पर कोई सुनवाई नहीं हो। इसी याचिका को खारिज कर दिया गया है। सुब्रमण्‍यम के अनुसार, लेकिन अभी मुख्‍य मामले को लेकर सुनवाई होनी है। वह यह है कि ज्ञानवापी मस्जिद में जिस जगह शिवलिंग पाया गया था वहां लोगों को पूजा करने की अनुमति दी जाए या नहीं। इस पर अब सुनवाई होगी।

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मुस्लिम पक्ष को याचिका नहीं दाखिल करनी चाहिए थी
सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को यह याचिका दाखिल ही नहीं करनी चाहिए थी। उन्‍हें लगता है कि कोर्ट ने बिल्‍कुल सही किया है। जब सुब्रमण्‍यम स्‍वामी से पूछा गया कि इस फैसले का क्‍या मतलब है तो उन्‍होंने कहा कि इसका मतलब है कि अब कोर्ट को फैसला देना है कि महिलाओं को ज्ञानवापी में पूजा की इजाजत दी जाए या नहीं। इसमें से एक रोड़ा कोर्ट ने हटा दिया है। इसके त‍हत मुस्लिम पक्ष चाहता था कि ऐसी किसी याचिका पर सुनवाई होनी ही नहीं चाहिए।

1991 के 'द प्लेसेज ऑफ वरशिप ऐक्ट' के खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर कर रखा है। इस पर भी सुनवाई होने वाली है। सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने हिंदू पक्ष की ओर से तमाम याचिकाकर्ता में से एक सीता साहू से कहा कि उन्‍हें डंटे रहना चाहिए वह उनके साथ हैं।

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सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने कहा कि जब मुस्लिम आक्रांता देश में आए तो उन्‍होंने कई मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों का निर्माण कराया। इसके उलट इस्‍लाम धर्म इसके लिए मना करता है। यानी मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों का निर्माण कराना गलत था।

'द प्लेसेज ऑफ वरशिप ऐक्ट' में सुब्रमण्‍यम स्‍वामी की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। उन्‍होंने कहा कि लड़ाई सिर्फ पूजा करने की नहीं है। हम तो मंदिर बनाना चाहते हैं। ज्ञानवापी मामले में एक अन्‍य याचिकाकर्ता जीतेंद्रानंद सरस्‍वती ने कहा कि यह जीत तो शुरुआती है। आगे भी सत्‍य ही जीतेगा। अभी तो श्रृंगार गौरी की पूजा के बहाने यह मुकदमा खुला है।

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सोमवार को कोर्ट में क्‍या हुआ?
वाराणसी की जिला अदालत ने सोमवार को ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले की मेनटेनबिल‍िटी पर सवाल उठाने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि वह पूजा के अधिकार की मांग वाली याचिका पर सुनवाई जारी रखेगा। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने बताया कि जिला न्यायाधीश एके विश्वेश ने मामले की मेनटेनब‍िल‍िटी पर सवाल उठाने वाली याचिका को खारिज करते हुए सुनवाई जारी रखने का निर्णय किया। इस मामले में पांच महिलाओं ने याचिका दायर कर हिंदू देवी-देवताओं की दैनिक पूजा की अनुमति मांगी थी। इनकी आकृतियां ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर बनी हैं। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति ने ज्ञानवापी मस्जिद को वक्फ संपत्ति बताते हुए कहा था कि मामला सुनवाई योग्य नहीं है। जिला न्यायाधीश ने पिछले महीने इस मामले में आदेश 12 सितंबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया था। मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

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