Congress National President: गहलोत अध्यक्ष बने तो छोड़नी पड़ेगी CM की कुर्सी, जानिए राहुल ने क्या कहा...

राहुल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सिर्फ एक संगठनात्मक पद नहीं है, यह एक वैचारिक पद और एक विश्वास प्रणाली है। 

 
rahul gandi

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी होने के साथ ही सियासी सरगर्मियां बढ़ गई हैं। गहलोत राहुल गांधी से मिलने केरल पहुंचे हैं। राहुल गांधी ने कोच्चि में पार्टी के अध्यक्ष पद के दावेदारों को सलाह दीं। राहुल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सिर्फ एक संगठनात्मक पद नहीं है, यह एक वैचारिक पद और एक विश्वास प्रणाली है। जो कोई भी कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि वे एक ऐतिहासिक स्थान ले रहे हैं। एक ऐसा स्थान जो भारत के एक विशेष दृष्टिकोण को परिभाषित करता है। होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष को विचारों के एक समूह, एक विश्वास प्रणाली और भारत के एक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करना होगा। उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अध्यक्ष और सीएम पद साथ रखने की इच्छा पर कहा कि उदयपुर अधिवेशन में एक व्यक्ति-एक पद पर हमने जो फैसला किया था, वह कायम रहेगा। 

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हालांकि गहलोत ने गुरुवार सुबह ही कह दिया था कि अध्यक्ष का पद एक व्यक्ति-एक पद के दायरे में नहीं आता, लेकिन इतिहास में कोई कांग्रेस अध्यक्ष मुख्यमंत्री नहीं रहा, इसलिए फैसला करना पड़ेगा। गहलोत ने पायलट को CM बनाने के सवाल पर कहा कि जो हालत राजस्थान के अंदर हैं, हाईकमान उसकी स्टडी करेगा और देखेगा कि विधायकों की क्या भावना है। यह ध्यान रखना होगा कि हम अगला चुनाव जीतें, क्योंकि अब कांग्रेस के पास बड़ा राज्य राजस्थान ही है। हमारे लिए यह फैसला बहुत नाजुक फैसला भी होगा और बहुत सोच-समझकर लेना पडे़गा। गहलोत ने पायलट के नाम पर ऐतराज होने के सवाल पर कहा, 'मैं किसी के नाम की न चर्चा करता हूं और न कर रहा हूं। 

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हमें यह देखना है कि कौन आए, जिससे मैसेज जाए कि पार्टी एकजुट है और हम किसी भी कीमत पर सरकार रिपीट करें। इससे अन्य राज्यों में भी पार्टी फिर से खड़ी हो। यह बहुत बड़ा फैसला होगा और यह सोच-समझकर लेना पड़ेगा। गहलोत ने कहा कि आज तक इतिहास में कोई कांग्रेस अध्यक्ष साथ में मुख्यमंत्री नहीं रहा है, इसलिए स्वाभाविक है कि जो प्रश्न उठते हैं, उसी आधार पर हम लोग भी फैसला करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि मुख्य विपक्षी की भूमिका में कांग्रेस में फिर से जान डालने के लिए काम करना है, फिर आप दो पद कैसे रख सकते हैं। अब सवाल आता है कि एक व्यक्ति-एक पद लागू नहीं होता, फिर भी अध्यक्ष बनने वाले को सोचना होगा कि वह दो पद कैसे रखेगा, वह अध्यक्ष पद को जस्टिफाई नहीं कर पाएगा।

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