ठंड के मौसम में क्यों बढ़ता है हार्ट अटैक का खतरा? कैसे रखें अपना ख्याल

ठंड का मौसम अक्सर लोगों का पसंदीदा मौसम माना जाता है लेकिन लोगों को यह भी समझना बहुत जरूरी है कि इसी ठंड में अपने दिल का भी ख्याल रखना आवश्यक है ।

 
ठंड के मौसम में क्यों बढ़ता है हार्ट अटैक का खतरा? कैसे रखें अपना ख्याल

डेस्क। ठंड के मौसम में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों के मामले बढ़ जाते हैं। लगभग पिछले 30 - 40 सालों में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। सेहत पर ध्यान ना देने के कारण, लक्षणों को देरी से समझने, ठंड के मौसम में अपने दिल का ख्याल न रखने और तनाव या फिर चिंता के कारण हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के डॉयरेक्टर एंड कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ. देवेंद्र कुमार श्रीमल ने बताया कि हालांकि ठंड का मौसम अक्सर लोगों का पसंदीदा मौसम माना जाता है लेकिन लोगों को यह भी समझना बहुत जरूरी है कि इसी ठंड में अपने दिल का भी ख्याल रखना आवश्यक है और इसके लिए सावधानियां बरतनी भी जरूरी है।

आखिर सर्दियों के मौसम में ही हार्ट अटैक के मामले क्यों बढ़ते हैं?

सर्दियों के मौसम में हार्ट अटैक के मामले बढ़ने का कोई सटीक कारण नहीं पता चल सका है लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ठंड के कारण हमारे शरीर के तापमान में गिरावट के कारण हृदय गति प्रभावित होती है और कुछ अध्ययनों से पता चला है सर्दियों के दौरान हार्ट प्रॉब्लम व स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ठंड के मौसम में नसें ज्यादा सिकुड़ती हैं और सख्त बन जाती हैं। इससे नसों को गर्म और फुर्तीला करने के लिए रक्त संचार बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने से हार्ट अटैक होने का खतरा भी बढ़ जाता है। यदि आपके शरीर का तापमान 95 डिग्री से कम हो जाता है तो हाइपोथर्मिया के कारण हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है।

हृदय रोगियों को ठंड के मौसम में किस प्रकार से हार्ट अटैक का जोखिम बना रहता है?

ठंड के मौसम में जब तापमान गिरता है तो शरीर गर्मी को नियंत्रित करने के लिए दुगनी मेहनत करता है और इससे हृदय की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ता है, शरीर में ऑक्सीजन की भी कमी हो जाती है। इस कारण पहले से ही हृदय रोग से ग्रसित लोगों को दिल का दौरा पड़ सकता है। इसलिए इस मौसम में उन लोगों को अधिक खतरा रहता है जिन्हें पहले से ही हार्ट अटैक आ चुका है या फिर हार्ट प्रॉब्लम से संबंधित उसका पारिवारिक इतिहास रहा है।

किन- किन कारणों से इस प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं?

सर्दियों में कई कारणों के चलते हृदय संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। ठंड के मौसम में शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है, व्यायाम में कमी आ जाती है या फिर कई लोग तो व्यायाम करना ही बंद कर देते हैं, कुछ लोग ठंड के मौसम में अपने आहार में बदलाव कर लेते हैं, कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है और इससे धमनियां भी प्रभावित होती है। इसके साथ लोगों को तनाव और चिंताओं पर नियंत्रण करना चाहिए क्योंकि तनाव का स्तर बढ़ने से उसका असर हृदय पर भी पड़ता है। खासकर ठंड के मौसम में तो तनाव लेने से हार्ट अटैक के कई मामले सामने आए हैं। इसके अलावा ठंड के मौसम में धूम्रपान और प्रदूषण के स्तर बढ़ने से भी हृदय संबंधित समस्याओं से होने वाली मौतों में 69 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

आप इन खतरों को कैसे कम कर सकते हैं?

1. नियमित एक्सरसाइज करें।
2. ठंड के मौसम में हमेशा गर्म कपड़े ही पहनें।
3. शरीर को हमेशा गर्म रखें।
4. हरी पत्तेदार सब्जियां व पोषण युक्त भोजन का सेवन करें।

ठंड के मौसम में बुजुर्ग ही नहीं बल्कि हर उम्र के व्यक्ति को अपने हृदय को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है। सर्दियों के मौसम में प्रदूषण का स्तर भी अधिक हो जाता है और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही आपके हृदय के लिए बहुत ही खतरनाक सिद्ध हो सकती है। इसलिए आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है-

1. लक्षणों को पहचाने, यदि आपको मतली या उलटी आ रही है, इसके अलावा चक्कर आना, सांस लेने में कठिनाई, जबड़े, पीठ, गर्दन या कंधों में दर्द, सुन्नता या झुनझुनी, ठंडा पसीना आना, ज्यादा थकान है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

2. अपने ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर लेवल की नियमित जांच करवाएं, यदि आप पहले से ही किसी प्रकार की हृदय संबंधित समस्या से ग्रसित हैं तो नियमित जांच करवाते रहें।

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