भेदभाव–छुआछूत मुक्त राजस्थान अभियान

मानवाधिकार मार्च एवं सभा
 
भेदभाव–छुआछूत मुक्त राजस्थान अभियान

जयपुर। जैसा कि आप जानते हैं कि देश जब आजादी का 75वां अमृत महोत्सव मनाने की तैयारी कर रहा था उसी वक्त एक 8 वर्षीय मासूम बालक की पानी के मटके को छूने के बदले मिली मौत की सजा ने पूरे राष्ट्र को स्तब्ध कर दिया है।  

ये पहली बार नहीं था ऐसा सदियों से राजस्थान में जाति वर्चस्व का घिनोना चेहरा दलितों की बर्बरतापूर्ण हत्याओं और अत्याचार के रूप में सामने आता रहा है। ऐसे हालातों में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनो के द्वारा न्याय के लिए उठाई आवाजों को जाति पंचायतों और अन्य प्रयासों से झुठलाकर सच को दबाया जाता रहा है। इंद्र मेघवाल की पिटाई के बाद मौत तो एक बानगी भर है। अगर राजस्थांन में ही 2016  से 2020 तक का दलित अत्याचार का आंकड़ा देखें तो 34276  मामले दर्ज हुए हैं। इसके अलावा ऐसे भी अनगिनत मामले हैं जो धोंस–दबाव और जबरन समझोते से दबा दिए जाते हैं।

पितृसत्ता और जातिवादी सामन्ती सोच की ताकतें राजस्थान के नागरिक समाज में शांति- सद्भाव- बंधुता- समता और न्याय के मानवीय मूल्यों को धत्ता बताकर अराजकता का माहौल बनाकर नफरत की राजनीति करने में जुटी हैं। हाशिये पर धकेल दिए गए महिला, दलित, आदिवासी, घुमंतू, मुस्लिम, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगजन समुदाय को जाति, धर्म और लिंग के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा हैं।

महिलाओं के साथ रेप, हिंसा है तो घुमन्तुओं के पास रहने का घर और मृतक के लिए शमशान की चंद गज जमीन भी नहीं है। अभी भी हथाई प्रथा के नाम पर महिलाओं के साथ लिंग भेद है तो आदिवासियों के जल जंगल जमीन के मुद्दे हैं तो चीता–मेहरातों के बीच राष्ट्रवाद के नाम पर बंधुता को भंग कर नफरत फैलाई जा रही है। दूसरी तरफ अभी भी दलित-दुल्हों को घोड़ी पर नहीं चढने देने, मात्र मूंछ रखने पर हत्या कर देना, उनकी जमीने हथियाना या  बाल नहीं काटने देने की जातिवादी सनकी सोच अभी भी फल-फूल रही है। बच्चों के साथ स्कूलों में भेदभाव, पिटाई हो रही है तो धर्मान्ध भीड़ सरेआम मोबलिंचिंग कर रही है। मिड- डे- मील में भेदभाव और नरेगा साईट पर पीने के पानी की व्यवस्था में भी भेदभाव की शिकायतें हैं। तो किसी सफाईकर्मी भाई को सिर्फ रोजी-रोटी के लिए ही सीवर में उतरकर मर जाना पड़ता है। 

ऐसे हालात में हम जागरूक नागरिकों पर शांति-समता-सद्भाव और न्याय का वातावरण स्थापित करने का संवेधानिक दायित्व आ गया है। आईए हम मिलकर समतामूलक समाज निर्माण के इस कदम में आगे आकर साझा नेतृत्व दें।

इस प्रकार राजस्थान के सामाजिक कार्यकर्ताओं और जन संगठनों की पहल पर  भेदभाव–छुआछूत मुक्त राजस्थान अभियान के नाम की पहचान का एक साझा प्रयास हमारे सामने है।

अत: अभियान 1 सितम्बर 2022 को जयपुर में मानवाधिकार मार्च और सभा के आयोजन में अपने मुद्दे के साथ शामिल होने का आह्वान करता है। सभा एवं रेली के आयोजन का समय प्रात: 11 बजे से सांय 4 बजे तक होगा। ये सभा शहीद स्मारक पर होगी एवं इसके बाद ये सभा रेली में परिवर्तित होकर, शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री आवास तक जाकर ज्ञापन सोंपेगी। 

आपकी महत्वपूर्ण भागीदारी इस जनप्रयास के साझे कदम को साकार करने में निर्णायक भूमिका लेगी।

Download app : अपने शहर की तरो ताज़ा खबरें पढ़ने के लिए डाउनलोड करें संजीवनी टुडे ऐप

From around the web