Murder: विश्व हिंदू सेवा दल के जिलाध्यक्ष की गोली मारकर हत्या, कोटे को लेकर हुआ था विवाद

गांव के राशन डीलर मान सिंह का धीरेंद्र व उसके भाई फुलवारी से कोटा वितरण के दौरान साल भर पहले विवाद हो चुका था।
 
Murder: विश्व हिंदू सेवा दल के जिलाध्यक्ष की गोली मारकर हत्या, कोटे को लेकर हुआ था विवाद

लखनऊ। बदायूं में विश्व हिंदू सेवा दल के जिलाध्यक्ष की बीती रात गोली मारकर हत्या कर दी। उनका शव खेतिहर इलाके में गांव से डेढ़ किमी दूर चकरोड के किनारे पड़ा मिला। उनकी सफारी गाड़ी भी पास में खड़ी थी और लाश से कुछ दूरी पर तमंचा भी पड़ा था। हत्या का आरोप गांव के कोटेदार की शिकायत करने वाले लोगों पर है। हिंदू नेता कोटेदार और शिकायतकर्ता में समझौता कराने का प्रयास कर रहे थे। जबकि शिकायत करने वाले  समझौता नहीं करना चाह रहे थे। घटना मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव गिधौल की है। गांव निवासी प्रदीप कश्यप (30) विश्व हिंदू सेवा दल के जिलाध्यक्ष थे। गांव वालों के मुताबिक प्रदीप की गाड़ी रुकवाकर गोलियां मारी गईं। वारदात उस वक्त हुई जब वह अपने घर लौट रहे थे।

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एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया, "बरामद तमंचे की जांच कराई जा रही है। परिजनों की ओर से तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। अभी तक कोटे की रंजिश में मर्डर का तथ्य सामने आया है। परिवार के लोगों ने गांव के धीरेंद्र पर आरोप लगाया है, आरोपियों की तलाश की जा रही है।"

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दरअसल ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के राशन डीलर मान सिंह का धीरेंद्र व उसके भाई फुलवारी से कोटा वितरण के दौरान साल भर पहले विवाद हो चुका था। इस विवाद के बाद दोनों में रंजिश थी। चार दिन पहले दोनों पक्षों में फिर कहासुनी हुई तो कोटेदार मान सिंह ने इसकी शिकायत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से की थी। इसपर इंस्पेक्टर राजेश यादव ने हिंदू नेता प्रदीप से कहा था कि दोनों पक्षों में समझौता करवा दो। हिंदू नेता प्रदीप ने बीती 16 नवंबर को गांव के प्रेमपाल के घर में दोनों पक्षों को बुलवाया। वहां काफी लोग पहले से मौजूद थे। सभी की मौजूदगी में सुलहनामा लिखवा दिया गया। 

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इसी बीच अचानक धीरेंद्र और फुलवारी ने समझौतानामा फाड़कर फेंक दिया था। साथ ही प्रदीप को नेतागिरी करने की बात कहकर पहले उनसे निपटने की धमकी भी दी गई थी। प्रदीप ने विरोध किया तो धीरेंद्र और फुलवारी समेत उनके सहयोगियों ने मिलकर वहीं पर पीट दिया था। कोटेदार पक्ष के लोगों ने बमुश्किल बचाया तो दोनों भाई हत्या की धमकी देकर चले गए। प्रदीप ने इसकी शिकायत पुलिस समेत मुख्यमंत्री से भी की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

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