Indian Economy: आ गए GDP के आंकड़े, भारत में पहली तिमाही में 13.5 फीसदी की बढ़ोतरी, दिग्गज देशों का भी हाल बेहाल

चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में दो अंकों की वृद्धी देखी गई है। 

 
Indian Economy: आ गए GDP के आंकड़े, भारत में पहली तिमाही में 13.5 फीसदी की बढ़ोतरी, दिग्गज देशों का भी हाल बेहाल

नई दिल्ली। कोरोना महामारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी चोट पहुंचाया था। हालांकि, अब स्थिति बदलती दिख रही है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) ने वर्तमान वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था में 7.4 फीसदी की बेहतर वृद्धि होने का अनुमान लगाया है। चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में दो अंकों की वृद्धी देखी गई है। यह आंकड़ा अब 13.5 फीसदी हो चुका है। इसके पूर्व वर्ष में यह वृद्धि 20.1 फीसदी रही थी। भारत के लिए राहत की बात यह है कि उसके GDP में सुधार ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं संकट के दौर से गुजर रही हैं। चीन तो मंदी की ओर जा रहा है।

इससे पिछले वित्त वर्ष (2021-22) की अप्रैल-जून तिमाही में GDP की वृद्धि दर 20.1 प्रतिशत रही थी। कई विश्लेषकों ने तुलनात्मक आधार को देखते हुए देश की आर्थिक वृद्धि दर दहाई अंक में रहने का अनुमान जताया था। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने GDP वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 13 फीसदी जबकि भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट में इसके 15.7 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी। 

यह खबर भी पढ़ें: शादी किए बगैर ही बन गया 48 बच्चों का बाप, अब कोई लड़की नहीं मिल रही

सीएसओ के आंकड़ों के अनुसार मौजूदा दामों के हिसाब से गणना पर देश की अर्थव्यवस्था का कुल आकार जून के अंत में 64.95 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा 51.27 लाख करोड़ रुपए था। 

क्या होती है GDP?
GDP देश के भीतर एक निश्चित समय के भीतर उत्पादित हुए सभी वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य होता है। यह वास्तव में किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का इंडीकेटर होता है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं, उन्हें भी शामिल किया जाता है।

यह खबर भी पढ़ें: शादी से ठीक पहले दूल्हे के साथ ही भाग गई दुल्हन, मां अब मांग रही अपनी बेटी से मुआवजा

महंगाई पर भी रखी जाती है नजर
वास्तविक जीडीपी की गणना करते समय महंगाई पर भी नजर रखी जाती है। इसी से यह सुनिश्चित होता है कि वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य में जो वृद्धि हुई है, असल में वह वृद्धि उत्पादन बढ़ने से हुई, न कि कीमतें बढ़ने से। जब महंगाई व अन्य मानकों को नजरअंदाज करते हुए, केवल वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य का आकलन किया जाता है, तो उसे नॉमिनल जीडीपी कहते हैं। इसमें से महंगाई के कारक को हटाने के बाद वास्तविक जीडीपी का पता चलता है। 

Download app : अपने शहर की तरो ताज़ा खबरें पढ़ने के लिए डाउनलोड करें संजीवनी टुडे ऐप

From around the web