नई दिल्ली । फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत के विशेष साइबर अपराध केंद्र ने ओपन सोर्स ऑपरेशन्स का उपयोग करके कंबोडिया में एक स्कैम कंपाउंड की सटीक भौगोलिक स्थिति (जियो-लोकेशन) का पता लगाया। इस सफल कार्रवाई के परिणामस्वरूप, धोखाधड़ी के इस नेटवर्क को चलाने वाले अपराधियों के चंगुल से मानव तस्करी का शिकार बने 81 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया। वैश्विक वित्तीय निगरानी संस्था एफएटीएफ ने गुरुवार को जारी अपनी रिपोर्ट में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में स्थित इन स्कैम कंपाउंड्स से जुड़े अवैध वित्तीय प्रवाह का मुकाबला करने के लिए उठाए जा रहे कदमों को रेखांकित किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2020 के बाद से औद्योगिकीकरण के स्तर पर फैले इस स्कैम मॉडल में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे सालाना अरबों अमेरिकी डॉलर का नुकसान हो रहा है।
रिपोर्ट में कंबोडिया के स्वाय रिएंग प्रांत के सबसे बड़े शहर बावेत में फंसे भारतीय नागरिकों से जुड़ा एक विशिष्ट मामला साझा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के उत्तरार्ध में बावेत के एक स्कैम कंपाउंड में बंदी बनाए गए भारतीयों द्वारा भेजा गया एसओएस संदेश नोम पेन्ह स्थित भारतीय दूतावास को मिला। दूतावास ने तुरंत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) को इसकी जानकारी दी और ओपन सोर्स डेटा के जरिए स्थान की सटीक ट्रैकिंग करने को कहा। इसके बाद कंबोडियाई अधिकारियों के साथ मिलकर चलाए गए दो दिवसीय अभियान के तहत सभी 81 भारतीयों को छुड़ा लिया गया। इससे पहले सरकार ने फरवरी में संसद में सूचित किया था कि वर्ष 2022 से 2025 के दौरान कंबोडिया, म्यांमार और लाओस के स्कैम सेंटर्स से कुल 6,998 भारतीयों को रेस्क्यू किया जा चुका है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया था कि फर्जी भर्ती एजेंटों और अवैध रास्तों के जरिए भारतीयों को आकर्षक आईटी नौकरियों का झांसा देकर साइबर धोखाधड़ी कराने के लिए इन देशों में भेजा जाता है।
वर्ष 2023 से 2024 के दौरान कंबोडिया, लाओस और म्यांमार से वापस लाए गए 15 भारतीय नागरिकों की पूछताछ और समीक्षा से पता चला है कि पीड़ितों को मुख्य रूप से थाईलैंड के रास्ते ले जाया जाता था और बाद में उनसे जबरन साइबर अपराध करवाए जाते थे। भर्ती के लिए इनसे 50,000 रुपये से लेकर 70,000 रुपये तक का शुल्क लिया जाता था, जो उन्हें कर्ज के जाल में फंसा देता था। एफएटीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, इन स्कैम कंपाउंड्स के भीतर वेतन भुगतान, आईटी और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रशासनिक काम तो अंदर ही संचालित किए जाते थे, लेकिन तस्करी किए गए लोगों की भर्ती, अवैध भुगतान गेटवे, सिम कार्ड की व्यवस्था, वीए रूपांतरण और डेटा ब्रोकरेज का काम बाहरी नेटवर्क को सौंपा जाता था।
रिपोर्ट में भारत के आई4सी नेटवर्क की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए बताया गया कि यह पीड़ित रिपोर्टिंग, वित्तीय हस्तक्षेप, बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने और अंतर-राज्यीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय को एक मंच पर लाता है। वर्ष 2021 में शुरू किया गया और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से एकीकृत ‘सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ (सीएफसीएफआरएमएस) वित्तीय संस्थानों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और वर्चुअल एसेट सेवा प्रदाताओं को जोड़ता है। यह प्रणाली रियल-टाइम में पैसों के लेन-देन का पता लगाने और धोखेबाजों की संपत्तियों तथा खातों को तुरंत फ्रीज करने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है।








