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October 23, 2026 7:55 pm

शरद पूर्णिमा 2026: 25 या 26 अक्टूबर की रात रखें खीर? जानें सही तारीख और समय

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शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। इस दिन चंद्रमा की पूजा करने, माता लक्ष्मी की आराधना करने और चांदनी में खीर रखने की परंपरा है। इस साल शरद पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों के मन में असमंजस है कि खीर 25 अक्टूबर की रात रखनी चाहिए या 26 अक्टूबर को। पंचांग के अनुसार, इस बार शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने के लिए 25 अक्टूबर 2026, रविवार का दिन उपयुक्त माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखकर अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

कब शुरू और कब समाप्त होगी पूर्णिमा तिथि?

पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इस कारण 25 अक्टूबर की रात पूर्णिमा तिथि रहेगी। वहीं, 26 अक्टूबर को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि होने के चलते इस दिन स्नान और दान जैसे धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।

शरद पूर्णिमा की रात्रिकालीन पूजा, चंद्रमा की आराधना और खीर रखने के लिए 25 अक्टूबर की रात को प्राथमिकता दी जा रही है। दूसरी ओर, पूर्णिमा तिथि के दौरान सुबह किए जाने वाले धार्मिक कार्य 26 अक्टूबर को किए जा सकते हैं।

शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का सही समय

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद खीर को चांदनी में रखने की परंपरा है। दिल्ली में 25 अक्टूबर को चंद्रोदय शाम करीब 5 बजे होने का अनुमान है। हालांकि, उस समय सूर्यास्त नहीं हुआ होगा। ऐसे में रात होने के बाद खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखना सुविधाजनक रहेगा।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, 25 अक्टूबर की रात 8 बजे के बाद खीर चांदनी में रख सकते हैं। यह समय सुविधा के लिहाज से बताया गया है, इसे अनिवार्य शास्त्रीय मुहूर्त नहीं माना जाना चाहिए। जिन घरों में मध्यरात्रि तक जागकर माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है, वहां परिवार अपनी मान्यताओं के अनुसार पूजा और भोग लगा सकते हैं।

26 अक्टूबर को पूर्णिमा होने के बावजूद खीर 25 की रात क्यों रखें?

इस भ्रम की मुख्य वजह उदयातिथि और रात्रिकालीन पूजा के अलग-अलग नियम हैं। कई धार्मिक व्रत और अनुष्ठान सूर्योदय के समय मौजूद तिथि के आधार पर किए जाते हैं। वहीं, शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा और कोजागरी लक्ष्मी पूजन के लिए रात के समय पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है।

25 अक्टूबर की रात पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, जबकि 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर यह तिथि समाप्त हो जाएगी। इसलिए चंद्रमा की पूजा और खीर रखने के लिए 25 अक्टूबर की रात को उचित माना गया है। वहीं, 26 अक्टूबर को सुबह पूर्णिमा तिथि के दौरान स्नान और दान किए जा सकते हैं।

क्या पूरी रात चांदनी में रखनी चाहिए खीर?

धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस अवसर पर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने और बाद में उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है। हालांकि, चांदनी में रखने से खीर में विशेष औषधीय गुण उत्पन्न होने का कोई स्थापित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

खीर को चांदनी में रखते समय स्वच्छ बर्तन का इस्तेमाल करें और उसे महीन जाली से ढक दें, ताकि धूल-मिट्टी या कीड़े उसमें न गिरें। साथ ही, दूध से बनी खीर को पूरी रात सामान्य तापमान पर छोड़ना सुरक्षित नहीं है। इसलिए कुछ समय तक प्रतीकात्मक रूप से चांदनी में रखने के बाद खीर को फ्रिज में रखना बेहतर होगा।

शरद पूर्णिमा की खीर कब खाएं?

परंपरा के अनुसार, 25 अक्टूबर की रात चंद्रमा को खीर का भोग लगाया जा सकता है। इसके बाद कई परिवार अगले दिन यानी 26 अक्टूबर की सुबह इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। हालांकि, खीर को खाने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसे सुरक्षित तरीके से रखा गया हो और वह खराब न हुई हो।

खीर रखने के लिए 25 अक्टूबर, स्नान-दान के लिए 26 अक्टूबर

पंचांग में दी गई तिथियों के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर खीर रखने के लिए 25 अक्टूबर 2026, रविवार की रात को प्राथमिकता दी जा सकती है। इस रात पूर्णिमा तिथि रहने के कारण चंद्रमा की पूजा, माता लक्ष्मी की आराधना और खीर का भोग लगाने की परंपरा निभाई जा सकती है। वहीं, 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहने के कारण स्नान और दान जैसे धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। इस तरह खीर रखने के लिए 25 अक्टूबर की रात और स्नान-दान के लिए 26 अक्टूबर की सुबह का ध्यान रखें।

ध्यान दें: धार्मिक मान्यताएं और पूजा की विधियां अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं। पूजा के सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग या संबंधित विद्वान से पुष्टि करना उचित रहेगा।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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