नई दिल्ली। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन में प्राकृतिक गैस के एक नए भंडार की खोज की है। यह खोज समुद्र के उथले पानी में स्थित एक ब्लॉक में की गई है, जिसे कंपनी ने हाल ही में डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड (DSF) की बोली प्रक्रिया के माध्यम से हासिल किया था। इस खोज को भारत में प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि शुरुआती जांच के दौरान कुएं से प्रतिदिन अधिकतम दो लाख मानक घन मीटर गैस का प्रवाह दर्ज किया गया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में देश की गैस आपूर्ति को मजबूती मिल सकती है।
जांच के दौरान कितनी गैस मिली?
ऑयल इंडिया लिमिटेड की यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिस स्थान पर प्राकृतिक गैस मिली है, वहां इससे पहले जांच नहीं की गई थी। कंपनी ने 16 अक्टूबर 2026 को इस कुएं में 2,027 मीटर की गहराई पर गैस की मौजूदगी का परीक्षण शुरू किया था। शुरुआती जांच के दौरान यहां से प्रतिदिन लगभग एक लाख मानक घन मीटर प्राकृतिक गैस का प्रवाह दर्ज किया गया। इसके बाद जब लगातार परीक्षण किया गया, तो गैस का प्रवाह बढक़र प्रतिदिन दो लाख मानक घन मीटर तक पहुंच गया।
कंपनी के अनुसार, इस कुएं से प्रतिदिन लगभग 170 बैरल कंडेनसेट मिलने की जानकारी भी सामने आई है। कंडेनसेट हाइड्रोकार्बन का एक तरल रूप है, जो प्राकृतिक गैस के साथ प्राप्त हो सकता है और जिसका औद्योगिक तथा ऊर्जा क्षेत्र में उपयोग किया जाता है। शुरुआती परीक्षणों में दर्ज किया गया गैस प्रवाह इस खोज की संभावनाओं को रेखांकित करता है। हालांकि, इस खोज से व्यावसायिक स्तर पर कितनी गैस का उत्पादन किया जा सकेगा, इसका आकलन आगे की जांच और विकास संबंधी गतिविधियों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कृष्णा-गोदावरी बेसिन में कहां मिली गैस?
ऑयल इंडिया लिमिटेड को प्राकृतिक गैस का यह नया भंडार कृष्णा-गोदावरी बेसिन के मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में मिला है। यह खोज KG-DSF/GSKW/2028 ब्लॉक के गोदावरी-1 कुएं में की गई है। कंपनी ने इस ब्लॉक को डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड की बोली प्रक्रिया के तहत हासिल किया था। समुद्र के उथले पानी में स्थित इस क्षेत्र में की गई खोज से घरेलू ऊर्जा संसाधनों के विकास की संभावनाएं बढ़ी हैं।
कृष्णा-गोदावरी बेसिन भारत के महत्वपूर्ण तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्रों में शामिल है। इस क्षेत्र में नई खोजों से देश के घरेलू ऊर्जा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और प्राकृतिक गैस के उत्पादन को बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में मिली गैस की मात्रा और उत्पादन क्षमता का विस्तृत आकलन आगे की तकनीकी जांच के आधार पर किया जाएगा।
भारत को प्राकृतिक गैस की नई खोज से क्या फायदा होगा?
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में देश के भीतर गैस के नए भंडार मिलने से घरेलू आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यदि ऑयल इंडिया लिमिटेड इस खोज को व्यावसायिक उत्पादन में बदलने में सफल रहती है, तो इससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए उपलब्ध घरेलू संसाधनों में वृद्धि हो सकती है।
घरेलू उत्पादन बढऩे से प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम करने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं। इससे ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव को सीमित करने में सहायता मिल सकती है। इसके अलावा, प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, औद्योगिक गतिविधियों और अन्य क्षेत्रों में किया जाता है। इसलिए घरेलू स्तर पर इसकी उपलब्धता बढऩा अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
हालांकि, किसी नए गैस भंडार की खोज और उससे बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने के बीच कई तकनीकी और व्यावसायिक चरण होते हैं। मौजूदा परीक्षण में प्रतिदिन दो लाख मानक घन मीटर तक गैस का प्रवाह दर्ज होना एक महत्वपूर्ण शुरुआती संकेत है, लेकिन इससे कुल उपलब्ध भंडार या भविष्य में होने वाले उत्पादन का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए विस्तृत मूल्यांकन, उत्पादन की व्यवहार्यता और आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास करना होगा।
कुल मिलाकर, कृष्णा-गोदावरी बेसिन के मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में ऑयल इंडिया लिमिटेड की यह खोज भारत के घरेलू प्राकृतिक गैस संसाधनों को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संभावना के रूप में देखी जा रही है। यदि आगे की जांच में इस भंडार का व्यावसायिक दोहन संभव पाया जाता है, तो इससे देश की गैस आपूर्ति मजबूत करने और आयात पर निर्भरता घटाने के प्रयासों को मदद मिल सकती है।








