कराची। पाकिस्तान की एक अदालत ने प्रांतीय फिल्म सेंसर बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह सिंध प्रांत में ‘घोस्ट स्कूल्स’ (कागजी स्कूलों) की समस्या पर बनी एक पुरस्कार विजेता वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) को स्क्रीनिंग प्रमाण पत्र देने से इंकार करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करे।
सिंध में ‘घोस्ट स्कूल्स’ का मुद्दा सर्वविदित है, जहां हजारों स्कूल केवल कागजों पर ही मौजूद हैं, लेकिन उन स्कूलों के शिक्षण स्टाफ के नाम पर नियमित रूप से वेतन जारी किया जाता है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, बुधवार को जारी एक आदेश में, न्यायमूर्ति यूसुफ अली सईद की अध्यक्षता वाली सिंध उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने सिंध फिल्म सेंसर बोर्ड को निर्देश दिया कि वह 10 दिनों के भीतर ‘घोस्ट स्कूल’ फिल्म के प्रमाणन पर दोबारा विचार करे। अदालत ने फिल्म से कुछ निश्चित दृश्यों और अभिव्यक्तियों को हटाने के बोर्ड के पहले के फैसले को भी खारिज कर दिया।
इस डॉक्यूमेंट्री को खुद वित्तपोषित करने, निर्मित और निर्देशित करने वाली ब्रिटिश-पाकिस्तानी फिल्म निर्माता सीमाब गुल ने बोर्ड द्वारा अगस्त में इसे स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट देने से इंकार किए जाने के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया था। गुरुवार को गुल ने कहा कि उनके पास न्यायिक हस्तक्षेप मांगने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सिंध में काम कर रहे सैकड़ों ‘घोस्ट स्कूल्स’ के बारे में एक अच्छी तरह से शोध की गई डॉक्यूमेंट्री है, जो हमारे बच्चों की शिक्षा को प्रभावित कर रहे हैं।’’
फिल्म निर्माता के वकील ने अदालत को बताया कि यह वृत्तचित्र एक 10 वर्षीय लडक़ी की कहानी पर आधारित है, जो यह पता लगाती है कि उसके गांव का इकलौता स्कूल इस अफवाह के बाद बंद हो गया है कि वह प्रेतबाधित (भूतिया) है। वकील ने दलील दी कि सिंध सेंसर बोर्ड ने सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाण पत्र देने से पहले आठ कट (छंटनी) करने का आदेश दिया था, जबकि इसी फिल्म को पाकिस्तान के केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड और पंजाब बोर्ड ऑफ फिल्म सेंसर्स द्वारा बिना किसी कटौती के अरेस्टेड (अनियंत्रित) स्क्रीनिंग के लिए मंजूरी दे दी गई थी।
गुल ने कहा कि यह वृत्तचित्र उस शोध पर आधारित है जिसमें प्रांत में ऐसे सैकड़ों स्कूलों की पहचान की गई थी। उन्होंने पहले ही सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान के अन्य सेंसर बोर्डों ने इसकी स्क्रीनिंग को मंजूरी दे दी थी, तो सिंध में इसे क्लीयरेंस क्यों नहीं दी गई।
डॉक्यूमेंट्री को लेकर यह विवाद पाकिस्तान में स्कूलों की स्थिति को लेकर जताई जा रही व्यापक चिंताओं के बीच सामने आया है। पड़ोसी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में, शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते बताया था कि सरकारी स्कूलों में लगभग 37,000 क्लासरूम जर्जर स्थिति में हैं। पेशावर में एक स्कूल की इमारत ढहने से 34 बच्चों सहित 35 लोगों की मौत की घटना के कुछ दिनों बाद ये आंकड़े सामने आए थे।








