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October 20, 2026 8:13 pm

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कैंसर के इलाज का खर्च होगा कम! 137 दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती, मरीजों की जेब पर क्या पड़ेगा असर?

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कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज लंबे समय तक चलने के कारण मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। महंगी दवाएं, नियमित जांच, अस्पताल का खर्च और अन्य चिकित्सा जरूरतें परिवार की बचत पर असर डालती हैं। ऐसे में कैंसर की दवाओं की कीमतों में कमी से जुड़ी खबर मरीजों के लिए काफी अहम है। 137 दवाओं की कीमतों में 70 प्रतिशत तक कटौती की खबर सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि इससे कैंसर के इलाज का खर्च कितना कम हो सकता है और मरीजों को वास्तव में कितनी राहत मिलेगी।

9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें

केंद्र सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य दवाओं की बिक्री और वितरण के दौरान लगने वाले अत्यधिक मार्जिन पर नियंत्रण करना और कैंसर के इलाज को अधिक किफायती बनाना है। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। सरकार के मुताबिक, संबंधित दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) में मौजूदा कीमतों के आधार पर 70 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है।

किन दवाओं पर पड़ेगा असर?

इस फैसले के दायरे में अलग-अलग प्रकार के कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं। इनमें इम्यूनोथेरेपी से जुड़ी दवाओं के साथ पेम्ब्रोलिजुमैब, डुरवालुमैब और ओसिमर्टिनिब जैसी दवाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा, स्तन और प्रोस्टेट कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली डेनोसुमैब तथा कैंसर के मरीजों में कुछ गंभीर संक्रमण संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाली पेगफिलग्रास्टिम जैसी दवाओं पर भी इस फैसले का असर पड़ सकता है। बेवाजिजुमैब जैसी दवाएं, जिनका उपयोग कुछ प्रकार के कोलन, ओवरी और सर्वाइकल कैंसर के उपचार में किया जाता है, भी इस पहल में शामिल हैं।

हालांकि, सभी दवाओं की कीमतों में एक समान 70 प्रतिशत की कटौती नहीं होगी। वास्तविक कमी संबंधित दवा की मौजूदा कीमत, उसकी मूल्य संरचना और नए नियमों के तहत तय की जाने वाली कीमत पर निर्भर करेगी।

मरीजों की जेब पर कितना पड़ेगा असर?

कैंसर के इलाज में कई बार लंबे समय तक महंगी दवाओं की जरूरत होती है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी आने से उन मरीजों को राहत मिल सकती है, जिनका उपचार इन 137 दवाओं पर निर्भर है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी दवा की कीमत में वास्तव में 50 प्रतिशत की कमी होती है, तो उसी दवा पर होने वाला खर्च आधा रह सकता है। लेकिन यह केवल समझाने के लिए एक उदाहरण है, किसी विशेष दवा की वास्तविक कीमत में कटौती का आंकड़ा नहीं।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि कैंसर के इलाज का कुल खर्च केवल दवाओं तक सीमित नहीं होता। अस्पताल में भर्ती, सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, जांच और डॉक्टर की फीस जैसे खर्च भी मरीज के कुल बिल को प्रभावित करते हैं। इसलिए दवाओं की कीमतें कम होने के बावजूद हर मरीज के कुल इलाज खर्च में समान अनुपात में कमी आए, यह जरूरी नहीं है।

सरकार ने पहले भी उठाए हैं ऐसे कदम

कैंसर की दवाओं को सस्ता बनाने के लिए सरकार पहले भी ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित करने की पहल कर चुकी है। वर्ष 2019 में 42 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमित करने की व्यवस्था लागू की गई थी। सरकारी जानकारी के अनुसार, उस कदम के बाद 526 ब्रांड की कैंसर दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 90 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई थी। अब 137 और दवाओं को इस व्यवस्था के दायरे में लाने का फैसला किया गया है।

नई व्यवस्था के तहत दवा कंपनियों को संशोधित कीमतों की जानकारी संबंधित प्राधिकरण को देनी होगी। खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को भी निर्धारित नई दरों के अनुसार दवाएं बेचनी होंगी तथा संशोधित मूल्य सूची प्रदर्शित करनी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कीमतों में कटौती का लाभ वास्तव में मरीजों तक पहुंचे।

कैसे पता करें दवाओं की नई कीमत?

मरीज और उनके परिजन दवाओं की संशोधित कीमतों की जानकारी राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की आधिकारिक वेबसाइट और ‘फार्मा सही दाम’ ऐप के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। नई दरें लागू होने के बाद दवा खरीदते समय बिल और पैकेट पर दर्ज अधिकतम खुदरा कीमत की जांच करना उपयोगी रहेगा। किसी दवा की कीमत को लेकर संदेह होने पर संबंधित फार्मेसी या अस्पताल से संशोधित मूल्य सूची के बारे में जानकारी ली जा सकती है।

कुल मिलाकर, कैंसर की 137 दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमित करने का सरकार का फैसला महंगे इलाज से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इस पहल का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित दवाओं की कीमतें कितनी घटती हैं और नई दरों को बाजार में कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। 9 नवंबर 2026 से नई कीमतें लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग दवाओं पर मरीजों की कितनी बचत होती है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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