गुजरात: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद यूसुफ पठान की जमीन को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में है। गुजरात के वडोदरा में जमीन आवंटन से जुड़े इस मामले में कथित तौर पर करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन 5.5 करोड़ रुपये में दिए जाने का दावा किया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर पहले भी गुजरात सरकार और यूसुफ पठान के बीच विवाद सामने आया था। मामला जमीन की कीमत, आवंटन की प्रक्रिया और सरकारी जमीन के इस्तेमाल से जुड़े सवालों के कारण सुर्खियों में रहा है।
वडोदरा में 978 वर्ग मीटर जमीन का मामला
यह पूरा मामला गुजरात के वडोदरा शहर के तांडलजा इलाके में स्थित 978 वर्ग मीटर के एक प्लॉट से जुड़ा है। यह जमीन वडोदरा नगर निगम (VMC) की है और यूसुफ पठान के घर के पास स्थित है। इस जमीन की अनुमानित बाजार कीमत करीब 20.53 करोड़ रुपये बताई गई है। ताजा घटनाक्रम में गुजरात सरकार ने इस प्लॉट को यूसुफ पठान को आवंटित करने की प्रक्रिया को मंजूरी दी है। हालांकि, नगर निगम की स्थायी समिति और आम सभा की मंजूरी सहित कुछ औपचारिकताएं अभी बाकी हैं।
₹5.5 करोड़ में जमीन देने का प्रस्ताव कैसे आया?
इस विवाद की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी, जब यूसुफ पठान ने अपने घर के पास स्थित इस जमीन को 99 साल की लीज पर देने का अनुरोध वडोदरा नगर निगम से किया था। उस समय जमीन की कीमत करीब 5.5 से 5.6 करोड़ रुपये आंकी गई थी। नगर निगम में जमीन आवंटन को लेकर प्रस्ताव पर चर्चा हुई, लेकिन गुजरात सरकार ने वर्ष 2014 में बिना सार्वजनिक नीलामी के जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी।
इसके बाद यह मामला लंबे समय तक विवादों में रहा। जमीन की मौजूदा कीमत बढ़कर करीब 20.53 करोड़ रुपये होने के बाद इसके आवंटन और सरकारी संपत्ति की कीमत तय करने की प्रक्रिया पर फिर सवाल उठने लगे।
अतिक्रमण के आरोप और हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
वर्ष 2024 में वडोदरा नगर निगम ने यूसुफ पठान को जमीन पर कथित अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बाद पठान ने कानूनी रास्ता अपनाया और मामला गुजरात हाईकोर्ट पहुंचा। अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। बाद में उन्होंने इस फैसले के खिलाफ अपील की।
जून 2026 में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि जमीन का औपचारिक आवंटन और भुगतान पूरा हुए बिना उस पर कब्जा कैसे किया गया। इसके बाद 31 अगस्त 2026 को यूसुफ पठान ने अपनी अपील वापस ले ली।
अब किस शर्त पर मिलेगी जमीन?
ताजा प्रस्ताव के मुताबिक, कुल 978 वर्ग मीटर जमीन में से 500 वर्ग मीटर हिस्सा आवासीय इस्तेमाल के लिए निशुल्क देने की बात है। शेष 478 वर्ग मीटर जमीन बाजार मूल्यांकन के 55 प्रतिशत पर आवंटित करने का प्रस्ताव है, यानी उस हिस्से पर 45 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
हालांकि, जमीन के लिए यूसुफ पठान को कितनी अंतिम राशि चुकानी होगी, यह अभी पूरी तरह तय नहीं हुआ है। नगर निगम संबंधित आदेश और मूल्यांकन की समीक्षा करने के बाद भुगतान की राशि निर्धारित करेगा। इसके बाद आवश्यक स्थानीय निकाय की मंजूरी मिलने पर ही आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
TMC छोड़ने के बाद फैसले पर उठे राजनीतिक सवाल
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। यूसुफ पठान ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर दूसरे राजनीतिक दल का रुख किया था। इसके करीब दो महीने बाद गुजरात सरकार की ओर से जमीन आवंटन को मंजूरी दिए जाने के घटनाक्रम पर चर्चा शुरू हो गई है।
विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस फैसले के समय को लेकर सवाल उठ सकते हैं, लेकिन केवल समय के आधार पर किसी राजनीतिक सौदे या पक्षपात को साबित नहीं माना जा सकता। जमीन आवंटन की प्रक्रिया, सरकारी आदेश और संबंधित अधिकारियों के निर्णय ही इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे।
14 साल पुराने विवाद में आया नया मोड़
यूसुफ पठान की जमीन से जुड़ा मामला करीब 14 साल से चल रहा है। वर्ष 2012 में शुरू हुई आवंटन प्रक्रिया, 2014 में राज्य सरकार की असहमति, 2024 में अतिक्रमण का नोटिस और हाईकोर्ट में चली कानूनी लड़ाई के बाद अब जमीन आवंटन का नया प्रस्ताव सामने आया है।
फिलहाल, गुजरात सरकार की मंजूरी के बाद भी पूरी प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है। नगर निगम की संबंधित समितियों की स्वीकृति और अंतिम कीमत तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यूसुफ पठान को यह जमीन किन शर्तों पर मिलेगी। यह मामला सरकारी जमीन के आवंटन, बाजार मूल्य और सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर चर्चा में है।








