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October 14, 2026 6:16 pm

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राहुल गांधी ने यूथ प्रदर्शनकारियों से की मुलाकात, पुलिस पर गंभीर आरोप; छात्रा बोली- प्राइवेट पार्ट पर मारा

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दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और जंतर-मंतर को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई का आरोप लगाने वाले छात्र-छात्राओं और युवा प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। 14 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी घायल प्रदर्शनकारियों के साथ मीडिया के सामने आए और उनके आरोपों को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का पक्ष मामले की पूरी तस्वीर समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, हालिया विरोध-प्रदर्शन के दौरान कई छात्र-छात्राओं को हिरासत में लिया गया था। उनका आरोप है कि हिरासत में लिए जाने के बाद बसों और पुलिस से जुड़े अन्य स्थानों पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने शारीरिक चोट लगने की बात भी कही। एक महिला प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत के दौरान उसके साथ मारपीट की गई। वहीं, कुछ युवा प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें पीटा और उनके साथ अनुचित व्यवहार किया। एक प्रदर्शनकारी ने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत में लेने की कार्रवाई मनमाने तरीके से की गई।

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों की बात सुनते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए और कथित दुर्व्यवहार के मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। राहुल ने प्रदर्शनकारियों से घटनाओं से संबंधित वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने की अपील भी की, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई के दौरान पेश किया जा सके। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

इस दौरान राहुल गांधी ने केरल की छात्रा अथिरा का भी जिक्र किया, जो दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई करती हैं। राहुल और प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पुलिस कार्रवाई के दौरान अथिरा को चोटें आईं। उन्होंने सुनने की क्षमता प्रभावित होने की शिकायत भी की। इस मामले में चोटों की प्रकृति और उनके कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच तथा चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन और चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच सामने आया है। विपक्षी दल और कुछ प्रदर्शनकारी मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चिंता जता रहे हैं तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से संबंधित आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।

जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद भी विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से लागू नियमों और अनुमति की शर्तों का पालन भी जरूरी है।

फिलहाल, इस मामले में प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच अहम है। यदि हिरासत के दौरान मारपीट या किसी अन्य तरह के दुर्व्यवहार की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, जांच पूरी होने से पहले किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। आने वाले दिनों में पुलिस का आधिकारिक पक्ष, चिकित्सकीय रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियो साक्ष्य इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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