Explore

Search

October 14, 2026 5:52 pm

लेटेस्ट न्यूज़

जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने वालों की बढ़ेगी मुश्किल! प्रदर्शन स्थल को लेकर बड़ा बदलाव, अब कानूनी कार्रवाई का खतरा

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन करने वालों के लिए नियमों और कानूनी प्रावधानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह स्थान लंबे समय से विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराने का प्रमुख केंद्र रहा है। लेकिन प्रदर्शन स्थल की कानूनी स्थिति में बदलाव की खबरों के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यहां विरोध प्रदर्शन करने वालों पर क्या असर पड़ेगा और नियमों का उल्लंघन करने पर किस तरह की कार्रवाई हो सकती है।

जंतर-मंतर पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और अन्य समूहों की ओर से प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। ऐसे में प्रदर्शन स्थल की अधिसूचित स्थिति, प्रशासन की अनुमति और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियम बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देशों के बाद उठाया गया, जिसमें विरोध-प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान निर्धारित करने की बात कही गई थी। पुलिस ने अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थल के रूप में निर्धारित किया है।

इस बदलाव के बाद जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने वालों के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसका एक उदाहरण कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के मामले में सामने आया। पुलिस के अनुसार, दोनों नेता कथित तौर पर बिना अनुमति प्रतिबंधित प्रदर्शन क्षेत्र में दाखिल हुए थे। इसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया। पार्टी के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा किए जाने की भी खबर है।

इस मामले में पुलिस की कार्रवाई ने प्रदर्शन स्थलों की अनुमति और कानूनी नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां प्रशासन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए निर्धारित नियमों के पालन पर जोर दे रहा है, वहीं विरोध-प्रदर्शन करने वाले समूहों के सामने अपने मुद्दे उठाने के लिए नए स्थानों और अनुमति की प्रक्रिया को समझने की चुनौती है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े एक अन्य मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सुनवाई की। यह मामला इंडियन यूथ कांग्रेस की उस याचिका से संबंधित था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी गई थी। पुलिस ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर को अब आधिकारिक प्रदर्शन स्थल नहीं माना जा रहा है और वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए जा चुके हैं। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा।

प्रदर्शन स्थल में हुए इस बदलाव का असर आने वाले दिनों में दिल्ली में होने वाले धरना-प्रदर्शनों पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देश में विरोध दर्ज कराने का अधिकार समाप्त हो गया है। नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन के लिए लागू नियमों, प्रशासनिक अनुमति और अदालतों के निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।

ऐसे में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की योजना बनाने वाले संगठनों को मौजूदा नियमों और अनुमति की शर्तों पर ध्यान देना होगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों की व्यवस्था किस तरह लागू होती है और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार तथा सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर