दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पार्टी के कुछ विधायकों से जुड़ा गुरुद्वारा विवाद चर्चा में है। गुरुद्वारे में प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर जबरन प्रवेश कराने के आरोपों के बाद केजरीवाल और AAP विधायकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है। इस मामले ने धार्मिक स्थल की मर्यादा, राजनीतिक प्रदर्शन और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों को गुरुद्वारे के भीतर ले जाया गया। हालांकि, आरोपों और घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के आधार पर ही हो सकती है। एफआईआर दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि जिन लोगों के नाम मामले में आए हैं, उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पार्टी के विधायकों और अन्य नेताओं का नाम शामिल है। कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने आरोप लगाया कि गुरुद्वारा बंगला साहिब परिसर में राजनीतिक नारेबाजी की गई और घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर भ्रामक तरीके से प्रसारित किए गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
यह विवाद 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे कुछ लोगों को पुलिस ने रोका और हिरासत में लिया था। इसके बाद गुरुद्वारे में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी को लेकर विवाद बढ़ गया। आम आदमी पार्टी की ओर से भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।
फिलहाल मामले में आरोपों की जांच जारी है। एफआईआर दर्ज होने का मतलब आरोप साबित होना नहीं है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि घटना के दौरान क्या हुआ और किसकी क्या भूमिका थी।








