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October 10, 2026 8:34 pm

बार-बार चिड़चिड़ापन, नींद की कमी और घबराहट को न करें नजरअंदाज, थायरॉइड असंतुलन भी हो सकता है वजह

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आजकल की व्यस्त जीवनशैली में चिड़चिड़ापन, बेचैनी, नींद न आना और अचानक घबराहट जैसी समस्याओं को अक्सर तनाव या मानसिक थकान से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में इन लक्षणों के पीछे शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी जिम्मेदार हो सकते हैं। थायरॉइड हार्मोन का संतुलन बिगड़ने पर शरीर के साथ-साथ मूड, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी वजह समझना जरूरी है।

थायरॉइड गर्दन के सामने स्थित तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि है। यह ऐसे हार्मोन बनाती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा के इस्तेमाल, हृदय गति और कई अन्य शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब यह ग्रंथि जरूरत से ज्यादा या कम हार्मोन बनाने लगती है, तो शरीर के सामान्य कामकाज में बदलाव दिखाई दे सकते हैं।

थायरॉइड असंतुलन का मूड पर क्या असर पड़ता है?

जब थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तो इस स्थिति को हाइपरथायरॉइडिज्म कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को बेचैनी, घबराहट, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज होने और रात में नींद आने में परेशानी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। कुछ लोगों को हाथों में कंपन, अधिक पसीना आने और गर्मी सहन न होने की शिकायत भी हो सकती है।

वहीं, जब थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती, तो इसे हाइपोथायरॉइडिज्म कहा जाता है। इस स्थिति में थकान, सुस्ती, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, उदासी और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां सामने आ सकती हैं। कुछ लोगों को सामान्य से ज्यादा नींद आने के बावजूद थकान महसूस होती है। हालांकि, हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते।

क्या अचानक घबराहट और नींद की कमी थायरॉइड के संकेत हैं?

अचानक घबराहट होना, बार-बार मूड बदलना या रात में नींद नहीं आना अपने आप में थायरॉइड की बीमारी की पुष्टि नहीं करता। तनाव, चिंता, कैफीन का अधिक सेवन, नींद की अनियमित दिनचर्या और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

अगर चिड़चिड़ापन, बेचैनी या नींद की परेशानी लंबे समय से बनी हुई है और इसके साथ वजन में अनपेक्षित बदलाव, लगातार थकान, दिल की धड़कन तेज होना या गर्मी अथवा ठंड ज्यादा लगना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना उचित है।

थायरॉइड की जांच कैसे होती है?

डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के आधार पर थायरॉइड की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। आमतौर पर टीएसएच (TSH) जांच के साथ जरूरत के अनुसार फ्री टी4 (Free T4) और अन्य टेस्ट किए जाते हैं। इनकी मदद से यह समझने में मदद मिलती है कि थायरॉइड हार्मोन का स्तर सामान्य है या नहीं। जांच के परिणामों का आकलन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

यदि थायरॉइड असंतुलन की पुष्टि होती है, तो उसका उपचार बीमारी के प्रकार और गंभीरता के अनुसार किया जाता है। सही इलाज से कई लोगों में शारीरिक और मानसिक लक्षणों में सुधार हो सकता है। हालांकि, दवा की जरूरत और उसकी खुराक हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। बिना डॉक्टर की सलाह के थायरॉइड की दवा शुरू करना, बंद करना या उसकी खुराक बदलना उचित नहीं है।

मानसिक स्वास्थ्य और थायरॉइड, दोनों का रखें ध्यान

बेहतर नींद की दिनचर्या अपनाना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना और तनाव को नियंत्रित करने के उपाय करना सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है। इसके बावजूद अगर बेचैनी, उदासी या नींद की समस्या बनी रहती है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। थायरॉइड की जांच सामान्य आने पर भी लगातार मानसिक परेशानियों के लिए डॉक्टर से मदद ली जा सकती है।

कुल मिलाकर, बार-बार चिड़चिड़ापन, नींद की कमी और घबराहट को केवल तनाव मानकर टालना ठीक नहीं है। थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन इन लक्षणों की संभावित वजहों में से एक हो सकता है, लेकिन सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है। समय पर जांच और उचित उपचार से समस्या को समझने और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

महत्वपूर्ण बात: यह सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी है, किसी व्यक्तिगत बीमारी का निदान नहीं। लक्षण लगातार बने रहने पर डॉक्टर या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से परामर्श लें।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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