जालंधर: पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। कैंपस में आगजनी, संपत्ति को नुकसान और हिंसा की घटनाओं के बाद अब करीब 30-40 छात्रों को जांच के दायरे में रखे जाने की जानकारी सामने आई है। विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय अनुशासनात्मक समिति बनाए जाने की बात कही है।
इसी बीच LPU की छात्रा रम्या मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर छात्र और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फरहत देव की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। रम्या ने दावा किया कि जिस रात कैंपस में हंगामा शुरू हुआ, उस दौरान DSW परिसर में जाने वाले शुरुआती लोगों में फरहत देव शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि फरहत ने एक अन्य व्यक्ति को अंदर बुलाया और इसके बाद वहां तोड़फोड़ हुई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
30-40 छात्रों की भूमिका की जांच
LPU में हुए हिंसक घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय की ओर से छात्रों की भूमिका की जांच की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 30-40 छात्रों को जांच के दायरे में रखा गया है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कैंपस में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ के दौरान किन छात्रों की क्या भूमिका थी।
इस बीच कुछ छात्रों की ओर से फरहत देव की पहचान किए जाने और उन पर ट्रॉफी तोड़ने समेत अन्य आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, किसी व्यक्ति पर लगे आरोपों को जांच पूरी होने से पहले स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
छात्रा के वीडियो से बढ़ा विवाद
रम्या मिश्रा ने अपने वीडियो में DSW से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए फरहत देव से सवाल किए। उनका दावा है कि फरहत छात्रों के बीच गुस्सा बढ़ा रहे थे और खुद को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का चेहरा बता रहे थे। उन्होंने DSW में हुई तोड़फोड़ में उनकी संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।
रम्या के दावों के मुताबिक DSW के अंदर कैमरे और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इस मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
फरहत देव ने आरोपों से किया इनकार
रम्या मिश्रा के आरोपों के बाद फरहत देव ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी सफाई दी। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने खुद लोगों को तोड़फोड़ से रोकने की कोशिश की थी। उनका कहना है कि उनके पास उस समय के कुछ वीडियो भी हैं, जिनमें घटनास्थल पर मौजूद लोगों को देखा जा सकता है।
फरहत ने DSW में तोड़फोड़ के आरोपों से भी इनकार किया। उनके अनुसार, वह DSW के अंदर गए थे, लेकिन बाद में वहां से बाहर आ गए। उन्होंने कहा कि ट्रॉफी तोड़ने की घटना में उनका कोई हाथ नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ धमकी भरे वीडियो सामने आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो से बढ़ी चर्चा
LPU विवाद के बीच कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इनमें प्रदर्शन के दौरान छात्रों की गतिविधियों और कैंपस में हुई घटनाओं के अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित हर वीडियो या दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से तय करना उचित नहीं होगा।
इस मामले में पुलिस और विश्वविद्यालय की जांच अहम होगी, क्योंकि घटनाओं के दौरान बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे और अलग-अलग स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे।
पहले अफवाह से शुरू हुआ था विवाद
LPU में विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर छात्रा से जुड़े गंभीर दावों और अफवाहों के प्रसार के बाद हुई थी। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन दावों की पुष्टि को लेकर सावधानी बरतने की अपील की गई थी। इसके बाद प्रदर्शन तेज हुआ और कैंपस के साथ-साथ हाईवे पर भी तनाव की स्थिति बनी।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की खबरें भी सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ वाहनों और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।
जांच के बाद ही साफ होगी जिम्मेदारी
फिलहाल LPU मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि हिंसा और तोड़फोड़ के दौरान वास्तव में किन लोगों की क्या भूमिका थी। विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक समिति और संबंधित जांच एजेंसियों की पड़ताल के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
AajTak की 29 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, फरहत देव के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उस समय तक पुलिस की ओर से किसी के खिलाफ शिकायत या FIR दर्ज होने की जानकारी नहीं थी।
ऐसे में फिलहाल 30-40 छात्रों की जांच, रम्या मिश्रा के आरोप और फरहत देव की सफाई—तीनों पहलू इस मामले का हिस्सा हैं। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कैंपस में हुई तोड़फोड़ और हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार था।








