पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले 72 घंटे बेहद अहम रहे। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने पार्टी के पारंपरिक नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ को अंतरिम तौर पर फ्रीज कर दिया। इसका सीधा असर आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों पर पड़ा। आयोग के मुताबिक, पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुट खुद को असली TMC बताते हुए दावा कर रहे हैं, इसलिए विवाद के अंतिम निपटारे तक दोनों को अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए गए।
पहला दिन: TMC के नाम और निशान पर रोक
17 सितंबर को चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों गुटों को TMC के मूल नाम और ‘फूल-घास’ वाले पारंपरिक चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया। आयोग ने कहा कि पार्टी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी समूह सामने आए हैं और उनके दावों पर विस्तृत फैसला जरूरी है। दोनों पक्षों से नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे गए। (The Indian Express)
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि TMC का पारंपरिक चुनाव चिह्न लंबे समय से पार्टी की पहचान का हिस्सा रहा है। अब दोनों गुटों को उपचुनाव में अलग पहचान के साथ मैदान में उतरना था।
दूसरा दिन: नया नाम और नया चुनाव चिह्न
18 सितंबर को चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के लिए अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिह्न मिला। वहीं प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि ये व्यवस्थाएं आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम हैं और मूल पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला अलग प्रक्रिया के तहत होगा।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। ये उनके आरोप हैं; इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों में नहीं हुई है।
नंदीग्राम में दूसरा झटका
इसी दौरान नंदीग्राम से TMC उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके नामांकन वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला किया और कांग्रेस को ‘बहन पार्टी’ बताया। इसके बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की खबर सामने आई। ममता गुट ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक दबाव बताया, जबकि ऐसे आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए। (Jagran)
नंदीग्राम का घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि यह सीट बंगाल की राजनीति में खास महत्व रखती है और ममता बनर्जी तथा सुवेंदु अधिकारी के बीच पहले भी यहां कड़ा राजनीतिक मुकाबला हो चुका है।
तीसरा दिन: रेजीनगर में उम्मीदवार का यू-टर्न
रेजीनगर में भी ममता गुट को उस समय झटका लगा जब उसके उम्मीदवार और पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी ने नामांकन वापस लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने नए चुनाव चिह्न को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच पहचान की समस्या और अन्य परिस्थितियों का हवाला दिया।
हालांकि करीब डेढ़ घंटे बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और चुनाव लड़ने की घोषणा की। रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी के निर्देश के बाद उन्होंने उम्मीदवारी बरकरार रखी। पुलिस की ओर से सुरक्षा का आश्वासन मिलने की बात भी सामने आई।
अब आगे क्या?
इन तीन दिनों में ममता बनर्जी के सामने पार्टी की पहचान, चुनावी तैयारी और उम्मीदवारों से जुड़े कई सवाल एक साथ सामने आए। फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से दिए गए नए नाम और चुनाव चिह्न उपचुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था हैं। मूल TMC नाम और पारंपरिक ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम विवाद अभी बाकी है।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी है। अब इस कानूनी चुनौती और चुनाव आयोग की आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
इस तरह 72 घंटे के भीतर TMC विवाद ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से लेकर नंदीग्राम और रेजीनगर के उम्मीदवारों तक कई मोड़ देखे। आगामी उपचुनावों में नए नाम और नए चुनाव चिह्न के साथ उतरना ममता बनर्जी के गुट के लिए एक अलग राजनीतिक परिस्थिति पैदा करता है।








