उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने संगठन और जमीनी तैयारियों पर फोकस बढ़ा दिया है। इसी बीच रायबरेली सदर से बीजेपी विधायक अदिति सिंह ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया और इसकी तस्वीर भी साझा की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पिछले कुछ दिनों से अदिति सिंह के राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं।
अदिति सिंह की मुलाकात क्यों चर्चा में?
अदिति सिंह को लेकर हाल के दिनों में ऐसी अटकलें सामने आई थीं कि वह बीजेपी छोड़कर दोबारा कांग्रेस में जा सकती हैं। हालांकि, इन चर्चाओं को पहले भी खारिज किया गया था। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनकी मुलाकात और सामने आई तस्वीर ने इन अटकलों को लेकर राजनीतिक चर्चा को और बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मुलाकात को स्पष्ट रूप से ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया है।
विनोद तावड़े का यूपी में बढ़ा सक्रिय दौरा
दूसरी ओर, बीजेपी के प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े भी उत्तर प्रदेश में लगातार संगठनात्मक बैठकों में जुटे हैं। 18 अगस्त को यूपी का प्रभारी बनाए जाने के बाद यह उनका तीसरा दौरा बताया गया है। इस दौरे में उनका फोकस अवध, पूर्वांचल और प्रयागराज क्षेत्र में संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं से फीडबैक और आगामी चुनाव की तैयारियों पर है।
तावड़े ने गोरखपुर से अपने दौरे की शुरुआत की। यहां उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों और नेताओं के साथ संगठन से जुड़े मुद्दों पर बैठकें कीं। रिपोर्ट के मुताबिक, गोरखपुर क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों को लेकर भी संगठनात्मक मंथन किया गया। इसके बाद उनका अयोध्या और फिर प्रयागराज जाने का कार्यक्रम बताया गया है।
संगठन के अंदर की चुनौतियों पर भी चर्चा
गोरखपुर में तावड़े के साथ हुई बैठकों में स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों ने संगठन से जुड़े कई मुद्दे उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ नेताओं ने गुटबाजी, आपसी खींचतान और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा जैसे मुद्दों को सामने रखा। ऐसे में तावड़े का दौरा केवल चुनावी तैयारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर की स्थिति को समझने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संजय निषाद को लेकर भी सियासी चर्चा
उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सहयोगी दल निषाद पार्टी के अध्यक्ष और मंत्री संजय निषाद को लेकर भी हाल के दिनों में राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई हैं। संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर अटकलें लगने लगीं। संजय निषाद ने बाद में कहा कि अगर बीजेपी अपने दरवाजे बंद करती है तो वह दूसरे विकल्पों पर विचार करेंगे।
ऐसे राजनीतिक माहौल के बीच बीजेपी नेतृत्व की संगठनात्मक सक्रियता और नेताओं से संपर्क को लेकर चर्चा स्वाभाविक रूप से बढ़ी है। हालांकि, किसी नेता की मुलाकात या बैठक को अपने-आप में पार्टी बदलने या गठबंधन में बदलाव का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
मिशन-2027 पर बीजेपी का फोकस
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी और आरएसएस के बीच भी संगठनात्मक समन्वय को लेकर बैठकें हो रही हैं। हालिया बैठकों में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति, संगठन की तैयारियों और जमीनी फीडबैक पर चर्चा की गई है।
फिलहाल अदिति सिंह की योगी आदित्यनाथ से मुलाकात को मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिष्टाचार भेंट बताया है। वहीं विनोद तावड़े का लगातार यूपी दौरा पार्टी की संगठनात्मक तैयारियों और 2027 के चुनाव को लेकर बढ़ी सक्रियता को दिखाता है। आने वाले दिनों में इन बैठकों और नेताओं के बीच संपर्क से यूपी की राजनीति में आगे क्या तस्वीर बनती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।








