नई दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपने संबोधन के दौरान विपक्ष पर तीखे राजनीतिक तंज कसे। पीएम मोदी ने अपने भाषण में 2013 के SRCC दौरे की यादें ताजा कीं और देश के विकास, अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भरता तथा शासन व्यवस्था पर अपनी सरकार का पक्ष रखा।
‘माई-बाप कल्चर’ पर PM मोदी का हमला
प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक देश में ऐसा राजनीतिक मॉडल चला, जिसमें आम नागरिकों को सरकार पर निर्भर रहने की आदत डाल दी गई। उन्होंने इसे ‘माई-बाप कल्चर’ बताते हुए कहा कि उनकी सरकार का जोर लोगों को सशक्त बनाने पर है।
पीएम मोदी ने बैंकिंग व्यवस्था से करोड़ों लोगों को जोड़ने का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ लोग ऐसी पहल का भी विरोध करते थे। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों को देश की उपलब्धियों में भी कमियां ही नजर आती हैं।
उन्होंने कहा कि वह इस ‘माई-बाप कल्चर’ के सामने चट्टान की तरह खड़े हैं और सरकार का उद्देश्य नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाना है।
‘नाराज फूफा’ वाले तंज से विपक्ष पर निशाना
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधने के लिए ‘नाराज फूफा’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि समाज में दो तरह के लोग होते हैं—एक वे जो सकारात्मक सोच के साथ समाज की ताकत को राष्ट्र की ताकत में बदलते हैं और दूसरे वे, जो हर नए काम पर सवाल उठाते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों का पसंदीदा सवाल होता है—“इसकी क्या जरूरत है?” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, हाई-स्पीड ट्रेन, UPI, नई संसद और वीर सैनिकों के स्मारक जैसी परियोजनाओं पर भी सवाल उठाए गए थे।
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भारत ने ऐसे विरोधों का जवाब अपने विकास कार्यों से दिया और देशहित में जरूरी काम आगे भी जारी रहेंगे।
2013 के SRCC भाषण को भी किया याद
PM मोदी ने अपने 2013 के SRCC भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने देश को ‘गिलास आधा खाली’ नहीं बल्कि ‘पूरा भरा हुआ’ देखने की बात कही थी। उनका कहना था कि किसी देश की स्थिति का आकलन केवल समस्याओं के आधार पर नहीं बल्कि उसकी संभावनाओं को देखकर भी किया जाना चाहिए।
उन्होंने 2013 की आर्थिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उस दौर में कम आर्थिक वृद्धि, महंगाई, भ्रष्टाचार और नीतिगत चुनौतियों की बात कही। इसके मुकाबले उन्होंने मौजूदा दौर में आर्थिक गतिविधियों और विकास के विभिन्न आंकड़ों को भारत की मजबूती से जोड़कर पेश किया।
‘मेक इन इंडिया’ और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का जिक्र
प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने 2013 में इस तरह की सोच की बात की थी, तब कुछ लोगों को यह संभव नहीं लगती थी। उन्होंने दावा किया कि आज भारत में बने स्मार्टफोन दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंच रहे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में भारत बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन आयात करता था, जबकि अब भारत के मोबाइल फोन निर्यात में बड़ा इजाफा हुआ है। उन्होंने इसे देश में बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम से जोड़कर बताया।
डिफेंस प्रोडक्शन पर भी सरकार का रिपोर्ट कार्ड
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने रक्षा उत्पादन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले रक्षा जरूरतों के लिए भारत को काफी हद तक विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब देश में रक्षा उत्पादन का स्तर काफी बढ़ा है।
पीएम मोदी ने दावा किया कि भारत का रक्षा उत्पादन करीब ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच गया है और रक्षा निर्यात भी पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ा है। ये आंकड़े प्रधानमंत्री के संबोधन में दिए गए सरकारी दावों के रूप में सामने आए।
युवाओं और भविष्य के भारत पर जोर
SRCC के छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवाओं में देश को नई दिशा देने की क्षमता है। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, इनोवेशन, कृषि, अंतरिक्ष और खेल जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए बड़े लक्ष्यों की बात की।
उन्होंने छात्रों से सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने और समाज की ताकत को राष्ट्र की ताकत में बदलने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाली पीढ़ी विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विपक्ष का भी पलटवार
PM मोदी के भाषण के बाद कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि SRCC जैसे शैक्षणिक मंच का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए किया गया। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कार्यक्रम को लेकर बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा।
इस तरह SRCC का शताब्दी समारोह केवल कॉलेज की 100 साल की यात्रा और उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रधानमंत्री के भाषण में ‘माई-बाप कल्चर’, ‘नाराज फूफा’, विकास और विपक्ष की राजनीति प्रमुख मुद्दे बन गए।
कुल मिलाकर, PM मोदी ने अपने पुराने SRCC भाषण को मौजूदा दौर से जोड़ते हुए सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश करने की कोशिश की, जबकि विपक्ष ने उनके संबोधन को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए अलग-अलग मुद्दों पर सवाल उठाए।








