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September 2, 2026 7:56 pm

फाइटर पायलट से राम मंदिर के पहले CEO तक! ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाले जितेंद्र मिश्रा की पूरी कहानी

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अयोध्या: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक का लंबा करियर बिताने वाले मिश्रा ने फाइटर पायलट, टेस्ट पायलट, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख के तौर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। अब उनके अनुभव की अगली बड़ी परीक्षा राम मंदिर के प्रशासन और संचालन की जिम्मेदारी के रूप में होगी।

राम मंदिर ट्रस्ट को पहली बार मिला पूर्णकालिक CEO

जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति ट्रस्ट की बैठक में की गई। रिपोर्टों के मुताबिक CEO पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे और चयन प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्ट तैयार की गई थी। मिश्रा का चयन ऐसे समय हुआ है जब राम मंदिर परिसर का निर्माण आगे बढ़ चुका है और मंदिर से जुड़े प्रशासनिक, वित्तीय तथा संचालन संबंधी कामों का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

AajTak के अनुसार, नए CEO के तौर पर मिश्रा मंदिर के प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी प्रबंधन से जुड़े कामों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यानी उनकी जिम्मेदारी सिर्फ मंदिर के रोजमर्रा के संचालन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि बड़े स्तर पर प्रबंधन और व्यवस्था को मजबूत करने की भी होगी।

1986 में वायुसेना में शुरू हुआ सफर

जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन मिला था। इसके बाद उन्होंने फाइटर पायलट के रूप में अपना करियर शुरू किया और धीरे-धीरे वायुसेना के बेहद महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे।

अपने करीब 40 साल के करियर में उन्होंने फाइटर पायलट के साथ-साथ फाइटर कॉम्बैट लीडर और टेस्ट पायलट के रूप में भी काम किया। वे अमेरिका के Air Command and Staff College, Air University के पूर्व छात्र भी रहे हैं।

उनका करियर सिर्फ ऑपरेशनल उड़ानों तक सीमित नहीं रहा। विमान और सैन्य प्रणालियों के परीक्षण तथा मूल्यांकन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई। यही तकनीकी और ऑपरेशनल अनुभव आगे चलकर उनके वरिष्ठ कमांड पदों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण रहा।

कारगिल युद्ध के दौरान भी निभाई अहम भूमिका

जितेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय 1999 का कारगिल युद्ध रहा। उस समय वे मिराज-2000 से जुड़े ऑपरेशनल मिशनों का हिस्सा रहे और लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल तौर पर इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में शामिल टीम का हिस्सा थे।

कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन सफेद सागर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मिश्रा का इस दौर का अनुभव उनके फाइटर पायलट करियर में एक अहम पड़ाव माना जाता है।

टेस्ट पायलट के तौर पर भी बनाई पहचान

जितेंद्र मिश्रा की पहचान सिर्फ लड़ाकू विमान उड़ाने वाले अधिकारी के तौर पर नहीं रही। उन्होंने टेस्ट पायलट के रूप में भी लंबा अनुभव हासिल किया।

वे Aircraft and Systems Testing Establishment (ASTE) में चीफ टेस्ट पायलट और बाद में इसके कमांडेंट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इसके अलावा उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक डिवीजन में भी चीफ टेस्ट पायलट की जिम्मेदारी निभाई।

टेस्ट पायलट का काम विमान की क्षमता और सिस्टम का परीक्षण करने से जुड़ा होता है। इस भूमिका के लिए तकनीकी समझ, सटीक निर्णय क्षमता और बेहद अनुशासित तरीके से काम करने की जरूरत होती है।

वेस्टर्न एयर कमांड की संभाली कमान

अपने करियर के अंतिम चरण में जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण कमांडों में से एक वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) रहे।

यही वह भूमिका थी, जिसने उन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी रणनीतिक और ऑपरेशनल जिम्मेदारियों से जोड़ा। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, उस समय वेस्टर्न एयर कमांड के नेतृत्व में मिश्रा की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

उनका सैन्य करियर ऑपरेशनल कमांड, टेस्टिंग, रणनीतिक योजना और उच्च स्तर के प्रशासनिक अनुभव से होकर गुजरा। यही वजह है कि राम मंदिर ट्रस्ट की नई जिम्मेदारी के लिए उनका सैन्य प्रबंधन अनुभव खास माना जा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़ा नाम

जितेंद्र मिश्रा का नाम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी चर्चा में रहा। उस समय वे वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे। रिपोर्टों के अनुसार, इस भूमिका में उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र से जुड़े एयर ऑपरेशंस के नेतृत्व में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।

उनकी सेवा के लिए उन्हें कई सैन्य सम्मान भी मिले हैं। इनमें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM), अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) शामिल हैं।

3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव

जितेंद्र मिश्रा के लंबे सैन्य करियर में उनका उड़ान अनुभव भी खास रहा है। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी और 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान अनुभव हासिल किया।

फाइटर पायलट से लेकर टेस्ट पायलट और फिर वरिष्ठ कमांडर तक का यह सफर उनकी बहुआयामी सैन्य विशेषज्ञता को दिखाता है।

अप्रैल 2026 में हुए रिटायर

करीब चार दशक की सेवा के बाद जितेंद्र मिश्रा 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायुसेना से रिटायर हुए। रिटायरमेंट के समय वे वेस्टर्न एयर कमांड के AOC-in-C के पद पर थे। इससे पहले वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में भी वरिष्ठ जिम्मेदारियां संभाल चुके थे।

यानी वायुसेना से रिटायर होने के कुछ ही महीनों बाद उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में एक नई और बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिका मिल गई है।

अब राम मंदिर की जिम्मेदारी क्यों अहम?

राम मंदिर अब केवल निर्माण परियोजना नहीं रह गया है। अयोध्या में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचती है और मंदिर परिसर के साथ सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, वित्तीय व्यवस्था, सुविधाओं, कर्मचारियों, तकनीक और प्रशासन से जुड़े कई काम लगातार बढ़ रहे हैं।

ऐसे में CEO का पद ट्रस्ट के कामकाज को अधिक पेशेवर और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सैन्य सेवा में बड़े संगठनों और जटिल व्यवस्थाओं को संभालने का मिश्रा का अनुभव इस भूमिका में उपयोगी साबित हो सकता है।

मंदिर ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी, नई उम्मीदें

जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि मंदिर से जुड़े बढ़ते प्रशासनिक कामों को प्रभावी तरीके से संभाला जाए और श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाया जाए।

साथ ही वित्तीय और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भी ट्रस्ट पर सार्वजनिक ध्यान बना हुआ है। ऐसे में नए CEO से मजबूत प्रबंधन व्यवस्था और स्पष्ट प्रशासनिक प्रक्रियाओं की उम्मीद की जा रही है।

फाइटर पायलट से मंदिर प्रशासन तक का अनोखा सफर

जितेंद्र मिश्रा की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनका करियर एक असाधारण बदलाव दिखाता है। एक तरफ उन्होंने भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर शुरुआत की, कारगिल जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियान का अनुभव हासिल किया, टेस्ट पायलट के रूप में काम किया और वेस्टर्न एयर कमांड जैसे बड़े कमांड की जिम्मेदारी संभाली।

अब वही अधिकारी अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के रूप में एक बिल्कुल अलग तरह की जिम्मेदारी संभालेंगे। वायुसेना में मिली नेतृत्व क्षमता, संगठनात्मक अनुभव और बड़े स्तर पर संचालन का उनका अनुभव अब मंदिर प्रशासन में किस तरह काम आता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

फाइटर कॉकपिट से लेकर राम मंदिर के प्रशासनिक शीर्ष पद तक का जितेंद्र मिश्रा का सफर निश्चित तौर पर उनके लंबे और विविधतापूर्ण करियर का एक नया अध्याय है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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