राजस्थान में पिछले चार दिनों से कमजोर पड़ा मानसून अब एक बार फिर सक्रिय होने के संकेत दे रहा है। 2 सितंबर से प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जबकि 4 से 7 सितंबर के बीच कई संभागों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में बने मौसम सिस्टम का असर राजस्थान तक पहुंचने की उम्मीद है।
हालांकि, पूरे प्रदेश में एक साथ भारी बारिश होने की संभावना नहीं है। पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत ज्यादा रह सकती हैं, जबकि पश्चिमी राजस्थान में कई इलाकों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है।
राजस्थान में अगस्त के अंतिम दिनों और सितंबर की शुरुआत में मानसून की गतिविधियां काफी कमजोर हो गई थीं। कई जिलों में बारिश नहीं होने से दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली। कुछ शहरों में पारा 39-40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया। श्रीगंगानगर में हाल के दिनों में तापमान करीब 40 डिग्री तक पहुंचा, जिससे लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ा।
अब मौसम विभाग का अनुमान है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली के प्रभाव से मानसून की गतिविधियां दोबारा बढ़ सकती हैं। इससे लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
मौसम विभाग के 2 सितंबर के पूर्वानुमान के अनुसार भरतपुर और जयपुर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा कोटा और उदयपुर संभाग में भी कहीं-कहीं बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं पश्चिमी राजस्थान में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने का अनुमान है।
जयपुर के लिए IMD के स्थानीय पूर्वानुमान में 2 सितंबर को हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है। इसके बाद 3 से 6 सितंबर के बीच गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान दिया गया है।
3 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, कोटा और उदयपुर संभागों में कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर संभागों में भी कहीं-कहीं बारिश हो सकती है।
इस दौरान बादल छाने, गरज-चमक और स्थानीय स्तर पर तेज बारिश जैसी स्थिति बन सकती है। ऐसे में लोगों को मौसम में अचानक बदलाव के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
4 से 7 सितंबर के बीच राजस्थान में बारिश की गतिविधियां ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार भरतपुर, जयपुर, कोटा और उदयपुर संभागों में कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में बारिश की तीव्रता भी बढ़ सकती है।
खास तौर पर कोटा संभाग में इस दौरान कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश की संभावना बताई गई है। इससे किसानों को राहत मिल सकती है, लेकिन निचले इलाकों में जलभराव जैसी स्थानीय परेशानियां भी पैदा हो सकती हैं।
राजधानी जयपुर में भी आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। IMD के स्थानीय पूर्वानुमान के मुताबिक 2 सितंबर को अधिकतम तापमान करीब 37 डिग्री तक रह सकता है, जबकि 3 से 6 सितंबर के बीच गरज के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है।
बारिश के दौर के साथ तापमान में कुछ गिरावट आने की उम्मीद है। यानी पिछले कुछ दिनों से महसूस हो रही गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिल सकती है।
पश्चिमी राजस्थान के लिए तस्वीर थोड़ी अलग है। IMD की चेतावनी में 2 से 8 सितंबर तक पश्चिमी राजस्थान के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि बीकानेर और जोधपुर संभाग में 3 से 6 सितंबर के बीच कहीं-कहीं बारिश की संभावना जताई गई है।
इसका मतलब है कि मानसून की वापसी पूरे प्रदेश में समान रूप से नहीं होगी। पूर्वी राजस्थान में इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है, जबकि पश्चिमी जिलों में बारिश सीमित रह सकती है।
सितंबर की शुरुआत राजस्थान के लिए उतार-चढ़ाव वाले मौसम के साथ हो रही है। एक तरफ 2 से 7 सितंबर के बीच बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है, वहीं 8 सितंबर के बाद राज्य के ज्यादातर हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में फिर कमी आने की संभावना जताई गई है।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूरे सितंबर में लगातार बारिश का दौर बना रहेगा। फिलहाल सबसे ज्यादा उम्मीद सितंबर के पहले सप्ताह में होने वाली बारिश से है।
बारिश का यह दौर किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई इलाकों में पिछले कुछ दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी कम हुई है। सितंबर की शुरुआत में होने वाली बारिश खरीफ फसलों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
राजस्थान में इस मानसून सीजन में बारिश की कमी भी चिंता का विषय रही है। हाल की रिपोर्टों में राज्य में मानसूनी बारिश की कमी करीब 18 प्रतिशत बताई गई थी। ऐसे में सितंबर की बारिश इस कमी को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकती है।
बारिश रुकने के बाद कई शहरों में तापमान बढ़ा है। धूप और उमस के कारण लोगों को गर्मी का ज्यादा एहसास हो रहा है। अब अगर 4 से 7 सितंबर के बीच बारिश की गतिविधियां बढ़ती हैं तो तापमान में गिरावट आने और मौसम सुहावना होने की उम्मीद है।
हालांकि बारिश के साथ कुछ इलाकों में बिजली चमकने और गरज के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं। ऐसे मौसम में स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना जरूरी होगा।
राजस्थान में चार दिनों की मानसूनी सुस्ती के बाद अब मौसम फिर करवट ले रहा है। 2 सितंबर से पूर्वी राजस्थान में बारिश की शुरुआत हो सकती है और 4 से 7 सितंबर के बीच बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। जयपुर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभाग इस दौर में ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं पश्चिमी राजस्थान में बारिश अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है। 8 सितंबर के बाद प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून की गतिविधियां फिर कमजोर पड़ सकती हैं।
यानी राजस्थान में फिलहाल मानसून की वापसी के संकेत जरूर हैं, लेकिन बारिश पूरे प्रदेश में एक जैसी नहीं होगी। सितंबर के पहले सप्ताह में होने वाली बारिश किसानों और गर्मी से परेशान लोगों के लिए राहत लेकर आ सकती है।








