भारतीय शेयर बाजार में सितंबर के पहले कारोबारी दिन हल्की गिरावट के साथ कारोबार खत्म हुआ। मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे। निफ्टी 50 करीब 24,055.80 अंक पर बंद हुआ, जो पिछले बंद के मुकाबले 24.60 अंक यानी करीब 0.10% की गिरावट है। सेंसेक्स भी 76,944.28 अंक पर मामूली कमजोरी के साथ बंद हुआ।
बैंक और ऑटो शेयरों में बिकवाली
बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में आई बिकवाली से देखने को मिला। मंगलवार को बैंक इंडेक्स करीब 1.1% और ऑटो इंडेक्स लगभग 1.2% नीचे रहा। ऑटो सेक्टर में मारुति सुजुकी के शेयर में भी दबाव देखने को मिला और स्टॉक करीब 4.4% गिरा।
फार्मा और रियल्टी शेयरों में भी कमजोरी रही। इसके विपरीत IT और FMCG सेक्टर के कुछ शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत बनी चिंता
बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक कच्चे तेल की बढ़ती कीमत रही। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई। तेल महंगा होने से भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए आयात बिल और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ती है।
ऊंची तेल कीमतों का असर कंपनियों की लागत, मार्जिन और व्यापक आर्थिक माहौल पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल में तेजी के दौरान निवेशक अक्सर ज्यादा सतर्क रुख अपनाते हैं।
मजबूत GDP आंकड़ों का भी नहीं मिला पूरा फायदा
दिलचस्प बात यह रही कि बाजार में गिरावट ऐसे दिन आई जब भारत की अर्थव्यवस्था से मजबूत संकेत मिले। अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही। इसके बावजूद बढ़ती तेल कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के उत्साह को सीमित रखा।
यानी घरेलू आर्थिक आंकड़े सकारात्मक रहे, लेकिन वैश्विक जोखिमों ने बाजार की धारणा पर ज्यादा असर डाला।
वैश्विक बाजारों का भी दबाव
अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों में भी चिंता बढ़ाई है। बढ़ते कच्चे तेल के दाम और बॉन्ड यील्ड से महंगाई तथा ब्याज दरों को लेकर आशंकाएं मजबूत हुई हैं। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों के सेंटीमेंट पर पड़ा।
भारतीय बाजार में भी निवेशकों ने इसी वजह से जोखिम लेने में सावधानी बरती और चुनिंदा सेक्टरों में मुनाफावसूली देखने को मिली।
रुपये में दिखी मजबूती
दूसरी तरफ भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ और करीब ₹94.95 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, रुपये को RBI के हस्तक्षेप और डॉलर फ्लो से समर्थन मिला। हालांकि महंगा कच्चा तेल रुपये और देश के बाहरी संतुलन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
निवेशकों की नजर अब आगे की चाल पर
बाजार में फिलहाल निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है। इसके अलावा घरेलू आर्थिक आंकड़े और कंपनियों के प्रदर्शन से जुड़े संकेत भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगे।
कुल मिलाकर, मजबूत GDP ग्रोथ के बावजूद महंगा क्रूड, वैश्विक तनाव और बैंक-ऑटो शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। निफ्टी 24,055.80 पर बंद हुआ और 24,000 का स्तर अब बाजार के लिए अहम मनोवैज्ञानिक स्तर बना हुआ है।
नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है; ऊपर दी गई जानकारी समाचार रिपोर्टिंग के उद्देश्य से है, निवेश सलाह नहीं।








