Explore

Search

September 1, 2026 7:10 pm

चीनी की कीमत में बड़ा फर्क! मिल में ₹47 और रिटेल में ₹64, जानिए क्यों नहीं मिल रही ग्राहकों को राहत

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

चीनी की कीमतों को लेकर बाजार में इन दिनों अजीब स्थिति देखने को मिल रही है। मिल स्तर पर चीनी के दाम करीब ₹47 प्रति किलो तक गिर गए हैं, लेकिन खुदरा बाजार में ग्राहकों को अभी भी करीब ₹64 प्रति किलो का भाव चुकाना पड़ रहा है। यानी मिल और रिटेल कीमत के बीच करीब ₹17 प्रति किलो का अंतर बना हुआ है।

मिलों में तेजी से गिरे दाम

रिपोर्ट के मुताबिक, 18 अगस्त को एक्स-मिल चीनी की कीमत करीब ₹67 प्रति किलो तक पहुंच गई थी। इसके बाद सरकारी कदमों और घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद के बीच इसमें लगभग 30 फीसदी की गिरावट आई और 31 अगस्त को यह करीब ₹47 प्रति किलो रह गई।

सरकार ने उन मिलों को घरेलू बाजार में चीनी बेचने की अनुमति दी है, जिनके पास निर्यात के लिए तैयार चीनी थी। अनुमान है कि करीब 3 से 3.5 लाख टन रिफाइंड चीनी अगले दो महीनों में घरेलू बाजार में आ सकती है। इससे आपूर्ति बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।

फिर दुकानों पर ₹64 क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मिल से चीनी सस्ती हो चुकी है तो ग्राहक को इसका फायदा तुरंत क्यों नहीं मिल रहा?

इसकी प्रमुख वजह पुराना महंगा स्टॉक बताई जा रही है। खुदरा कारोबारियों ने जब चीनी की कीमत ज्यादा थी, तब पुराने भाव पर माल खरीदा था। अगर वे वही स्टॉक अचानक कम कीमत पर बेचते हैं तो उन्हें नुकसान हो सकता है। इसलिए कई कारोबारी पहले महंगे भाव पर खरीदा गया स्टॉक खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।

एक खुदरा कारोबारी आम तौर पर चीनी के कई बोरे स्टॉक में रखता है। जब तक वह पुराना माल बिक नहीं जाता और उसकी जगह कम कीमत वाला नया स्टॉक नहीं आता, तब तक खुदरा कीमतों में गिरावट धीरे-धीरे दिखाई देती है।

थोक और रिटेल के बीच भी अंतर

31 अगस्त के आसपास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव ₹64.23 प्रति किलो था, जबकि थोक कीमत करीब ₹59.72 प्रति किलो रही। इसका मतलब है कि मिल से लेकर ग्राहक तक पहुंचने के दौरान कीमत में अलग-अलग स्तर पर अंतर जुड़ता है।

उद्योग सूत्रों के अनुसार, एक्स-मिल और थोक कीमत में ₹2-3 प्रति किलो तथा एक्स-मिल और खुदरा कीमत में ₹7-8 प्रति किलो का अंतर सामान्य परिस्थितियों में भी देखा जाता है। मौजूदा स्थिति में पुराना महंगा स्टॉक इस अंतर को और बढ़ा रहा है।

ग्राहकों को कब मिल सकती है राहत?

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि थोक बाजार में कीमतों में बदलाव तेजी से दिखाई देता है, लेकिन खुदरा बाजार तक इसका असर पहुंचने में समय लगता है। एक उद्योग सूत्र के मुताबिक, खुदरा कीमतों में बदलाव दिखने में करीब 10 दिन तक लग सकते हैं।

इसलिए अगर कारोबारी पुराने महंगे स्टॉक को निकालकर नई कम कीमत वाली चीनी खरीदना शुरू करते हैं, तो आने वाले दिनों में दुकानों पर भी कीमतों में कमी दिखाई दे सकती है।

सरकार के कदमों का असर

चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी उपलब्ध कराने के साथ-साथ बड़े थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा से जुड़े नियम भी शामिल हैं। 1 सितंबर से महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े उपभोक्ताओं को एक समय में 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों में कृत्रिम तेजी को रोकना है। उपभोक्ता मंत्रालय के अनुसार, एक्स-मिल कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट के बाद खुदरा कीमतों में भी नीचे आने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

असली तस्वीर क्या है?

फिलहाल स्थिति यह है कि मिल में चीनी सस्ती हो चुकी है, लेकिन इसका पूरा फायदा ग्राहक तक पहुंचने में समय लग रहा है। पुराना महंगा स्टॉक, थोक और खुदरा कारोबार की लागत तथा कीमतों के धीरे-धीरे ट्रांसमिट होने की प्रक्रिया इसकी बड़ी वजह है।

यानी ₹47 की मिल कीमत का मतलब यह नहीं है कि उसी दिन हर दुकान पर चीनी ₹47 किलो मिलने लगेगी। जैसे-जैसे पुराना स्टॉक खत्म होगा और कम कीमत पर नया माल बाजार में आएगा, रिटेल कीमतों में भी गिरावट आने की उम्मीद है।

फिलहाल आम ग्राहकों की नजर इस बात पर है कि मिलों में आई करीब 30 फीसदी की गिरावट आखिर कब तक उनकी रसोई की चीनी की कीमत में दिखाई देती है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर