सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के एक महत्वपूर्ण फैसले ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े विवाद को नया मोड़ दे दिया है। मंगलवार को अदालत ने NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द करने का फैसला सुनाया। इसके साथ ही केंद्र सरकार की ओर से दूसरी प्रमुख मांग भी मान ली गई, जिसके बाद CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना प्रदर्शन वापस ले लिया।
क्या है पूरा मामला?
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत मई 2026 में CJI सूर्यकांत की एक मौखिक टिप्पणी के बाद हुई थी। सुनवाई के दौरान CJI ने फर्जी डिग्री रखने वाले कुछ लोगों की तुलना ‘कॉकरोच’ से की थी। इस टिप्पणी का व्यापक विरोध हुआ और सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक अंदाज में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का आंदोलन शुरू हो गया। बाद में यह छात्र आंदोलन का रूप ले लिया, खासकर NEET परीक्षा विवाद के दौरान।
जुलाई में CJP के नेतृत्व में जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर बड़े प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और FIR दर्ज होने के बाद विवाद और बढ़ गया था। प्रदर्शनकारियों ने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं—मुआवजा, FIR वापस लेना और भविष्य में कोई नई FIR न दर्ज होना।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मंगलवार को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जुलाई 20 से 25 के बीच दर्ज FIR वापस लेने के लिए तैयार है। साथ ही NEET विवाद में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का आश्वासन भी दोहराया गया।
अदालत ने इन FIR को रद्द करने का आदेश दिया। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने अदालत में बयान पढ़ते हुए कहा कि केंद्र के सकारात्मक आश्वासन और अदालत के आदेश को देखते हुए पार्टी 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस ले रही है।
सियासी तंज और प्रतिक्रियाएं
इस पूरे प्रकरण पर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा हो रही है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम को लेकर पहले से ही सियासी तंज चल रहा था। विपक्षी दलों और कुछ छात्र संगठनों ने CJI की मूल टिप्पणी को युवाओं के अपमान से जोड़कर हमला बोला था, जबकि CJI ने बार-बार सफाई दी कि उनका इशारा फर्जी डिग्री वालों की ओर था, न कि आम युवाओं की ओर।
CJI सूर्यकांत ने मंगलवार को कहा कि अगर दोनों पक्ष सद्भावना से काम करें तो किसी भी मुद्दे का समाधान संभव है। अदालत के इस रुख से मामला फिलहाल शांत होने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है।
यह फैसला न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CJP जैसे अनौपचारिक आंदोलन को सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से राहत मिलने से छात्र राजनीति और न्यायपालिका के रिश्तों पर नई बहस छिड़ने की संभावना है। अब देखना होगा कि मुआवजे और FIR वापसी की प्रक्रिया कितनी सुचारू रूप से पूरी होती है।








