अलवर (राजस्थान)। सोमवार शाम राजस्थान के अलवर जिले के बुटोली गांव में एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। करीब 8-9 साल का बच्चा भानु पतंग लूटने के चक्कर में 300 फीट गहरे खुले बोरवेल में जा गिरा। बच्चा करीब 48 फीट की गहराई पर फंस गया। करीब पांच घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
कैसे हुआ हादसा?
बुटोली गांव के रहने वाले शिशराम गुर्जर के बेटे भानु सोमवार शाम खेत की तरफ दौड़ रहे थे। गांव में पतंगबाजी चल रही थी और एक कटी हुई पतंग लूटने के लिए वह तेजी से भागे। खेत में एक पुराना खुला बोरवेल था, जिसके मुंह पर सिर्फ एक पत्थर रखा हुआ था। भानु का पैर उसी पत्थर पर पड़ा। पत्थर खिसकते ही बच्चा सीधे बोरवेल में जा गिरा।
बोरवेल करीब 300 से 400 फीट गहरा बताया जा रहा है। बच्चा लगभग 40 से 48 फीट की गहराई पर अटक गया। सौभाग्य से वह नीचे तक नहीं गिरा और उसकी आवाज ऊपर तक आ रही थी।
रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की खबर फैलते ही गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। पुलिस, प्रशासन, SDRF और NDRF की टीमें भी पहुंचीं। बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने और पानी भेजने की व्यवस्था की गई। तीन-चार जेसीबी मशीनों से बोरवेल के समानांतर सुरंग खोदने का काम शुरू किया गया।
ग्रामीणों ने भी अपनी सूझबूझ दिखाई। बच्चे को बाहर निकालने के लिए एक ग्रामीण को उल्टा लटकाकर नीचे भेजने की कोशिश भी की गई। करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात करीब 11 बजे भानु को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्चा होश में था और बात भी कर रहा था। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की और हालत सामान्य बताई।
खुले बोरवेल का खतरा
इस घटना ने एक बार फिर खुले और बेकार पड़े बोरवेलों के खतरे की याद दिला दी। कई गांवों में पुराने बोरवेल बिना ढक्कन के छोड़ दिए जाते हैं, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित होते हैं। प्रशासन ने ऐसे बोरवेलों को तुरंत ढकने के निर्देश दिए हैं।
भानु के सुरक्षित बाहर आने की खबर से पूरे गांव में राहत की लहर दौड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों ने रेस्क्यू टीम और प्रशासन का आभार जताया। यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए खुले गड्ढों और बोरवेलों पर सख्ती से नजर रखनी चाहिए।








