काठमांडू: नेपाल में हालिया भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है और अलग-अलग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में बड़ी संख्या में कर्मचारी फंस गए हैं। ताजा रिपोर्टों में 898 कर्मचारियों और अन्य लोगों के लापता या फंसे होने की बात सामने आई है। राहत और बचाव दल सुरंगों तक पहुंचने और अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।
सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचाने की कोशिश
बाढ़ के कारण कई सुरंगों के प्रवेश मार्ग मिट्टी, मलबे और पत्थरों से बंद हो गए हैं। ऐसे में बचावकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के अंदर तक पहुंचना है। कुछ स्थानों पर ड्रिलिंग के जरिए छोटा रास्ता बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि अंदर फंसे लोगों तक हवा और जरूरी सहायता पहुंचाई जा सके।
रिपोर्टों के अनुसार, एक सुरंग में ड्रिलिंग के बाद छोटे छेद के जरिए हवा पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इसके बाद बचाव दल सुरंग को और चौड़ा करने तथा अंदर तक पहुंचने की कोशिश में जुटा है। कुछ जगहों पर कैमरे और ऑक्सीजन पहुंचाने की भी कोशिश की जा रही है।
कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बाढ़ की चपेट में
नेपाल की अर्थव्यवस्था में जलविद्युत परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के पहाड़ी इलाकों में नदियों के आसपास बड़ी संख्या में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बनाए गए हैं। हाल की बाढ़ से भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास स्थित कई परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।
बाढ़ के पानी और मलबे ने परियोजनाओं के रास्तों को नुकसान पहुंचाया है। कई जगह सुरंगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। बचाव दलों को भारी मशीनरी और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाना पड़ रहा है।
त्रिशूली हाइड्रोपावर सुरंग में भी फंसे लोग
रिपोर्टों के मुताबिक त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में भी बड़ी संख्या में लोग फंसे थे। यहां बचाव अभियान में नेपाली सेना के साथ विशेषज्ञ टीमों ने काम किया। भारतीय विशेषज्ञों की टीम भी नेपाल पहुंचकर सुरंगों में खोज और बचाव अभियान में सहयोग कर रही है।
बचाव अभियान के दौरान सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए ड्रिलिंग और अन्य तकनीकी उपायों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मलबे और पानी के कारण हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है।
भारत और चीन की टीमें भी मदद में जुटीं
नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान में पड़ोसी देशों से भी मदद पहुंच रही है। भारत की विशेषज्ञ टीम सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव में सहायता कर रही है। चीन की विशेषज्ञ टीमें भी तकनीकी मदद के लिए अभियान से जुड़ी हैं।
भारतीय टीम ने पहले हवाई सर्वेक्षण के जरिए प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और इसके बाद जमीन पर खोज अभियान शुरू किया। सुरंगों की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण होने के कारण बचाव कार्य में विशेषज्ञ तकनीक और विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
नेपाली सेना ने संभाला मोर्चा
सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने के लिए नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस लगातार अभियान चला रही है। कुछ स्थानों पर सुरंग के रास्ते को खोलने के लिए खुदाई और ड्रिलिंग की जा रही है। बचाव दल मलबे के बीच रास्ता बनाने के साथ-साथ अंदर मौजूद लोगों की स्थिति का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
एक अन्य हाइड्रोपावर सुरंग से नेपाली सेना ने सैकड़ों लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। इससे उन सुरंगों में फंसे लोगों के लिए भी उम्मीद बढ़ी है, जहां अभी बचाव अभियान जारी है।
बाढ़ ने नेपाल में मचाई भारी तबाही
नेपाल में आई इस आपदा का असर केवल हाइड्रोपावर परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। बाढ़ और भूस्खलन से सड़कें, पुल, घर और कई अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए हैं और कई इलाकों में राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है।
हालांकि, मृतकों और लापता लोगों की संख्या अलग-अलग समय पर बदल रही है और विभिन्न सरकारी तथा मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ ताजा रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 550 से अधिक बताई गई है, जबकि अन्य रिपोर्टों में यह आंकड़ा 675 या उससे अधिक बताया गया है। इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़े आने तक संख्या को लेकर सावधानी जरूरी है।
ऑक्सीजन और जरूरी सामान पहुंचाना प्राथमिकता
सुरंगों में फंसे लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता ऑक्सीजन, भोजन और सुरक्षित निकासी की है। छोटे छेद के जरिए हवा पहुंचाने की कोशिश इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बचाव दल सुरंगों में कैमरे और अन्य उपकरण पहुंचाकर अंदर की स्थिति का आकलन करने का प्रयास कर रहे हैं।
बचावकर्मी सुरंगों में जमा मलबे और कीचड़ को हटाने में जुटे हैं। खराब मौसम और लगातार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अभियान जारी रखा गया है।
बचाव अभियान पर टिकी उम्मीदें
नेपाल में चल रहा यह रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद कठिन परिस्थितियों में किया जा रहा है। सुरंगों के रास्ते बंद हैं, कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित है और भारी मलबे के कारण बचाव दलों की गति भी प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद नेपाली सेना, स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ टीमें फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंगों में फंसे लोगों की सही स्थिति का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। छोटे छेद के जरिए हवा पहुंचाने की कोशिश और ड्रिलिंग अभियान से उम्मीद जगी है कि बचाव दल जल्द ही अधिक लोगों तक पहुंच बना पाएंगे।
नोट: नेपाल में राहत-बचाव अभियान अभी जारी है और मृतकों, लापता लोगों तथा सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की संख्या लगातार अपडेट हो रही है। ऊपर दिए गए आंकड़े उपलब्ध ताजा रिपोर्टों पर आधारित हैं; आधिकारिक आंकड़ों में बदलाव संभव है।








