उन्नाव। उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे पर भारी बारिश के बाद एक बार फिर सड़क की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उन्नाव में मरम्मत किए गए हिस्से यानी पैचवर्क पर दोबारा बड़ी दरारें दिखाई दी हैं। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पिछले कुछ दिनों में इसी एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में धंसाव, कटाव और गड्ढे जैसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं।
पैचवर्क के बाद फिर दिखीं दरारें
ताजा मामला उन्नाव के आसपास का बताया जा रहा है। यहां बारिश के बाद जिस हिस्से में पहले नुकसान हुआ था, वहां मरम्मत कर पैचवर्क किया गया था। लेकिन अब उसी मरम्मत वाले हिस्से में फिर से दरारें नजर आने लगी हैं।
बार-बार सामने आ रही ऐसी समस्याओं ने एक्सप्रेसवे की मजबूती, मरम्मत की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
पहले बना था करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा
इससे पहले भारी बारिश के बाद गंगा एक्सप्रेसवे के मेरठ-प्रयागराज कैरिजवे पर किलोमीटर 421 के आसपास सड़क और उसके किनारे का एम्बैंकमेंट क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई थी। यहां करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा बनने की बात रिपोर्टों में कही गई थी।
इसके बाद संबंधित टीम मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत शुरू की गई। लेकिन मरम्मत के बाद फिर नुकसान सामने आने से काम की टिकाऊपन पर सवाल उठ रहे हैं।
बारिश और जल निकासी पर सवाल
गंगा एक्सप्रेसवे पर सामने आ रही समस्याओं में बारिश के पानी के बहाव और मिट्टी के कटाव की भूमिका भी चर्चा में है। भारी बारिश के दौरान अगर पानी की निकासी सही तरीके से नहीं होती है तो सड़क के किनारे बने एम्बैंकमेंट और आसपास की मिट्टी प्रभावित हो सकती है।
यही वजह है कि अब सिर्फ सड़क की ऊपरी सतह की मरम्मत के बजाय ड्रेनेज, एम्बैंकमेंट और बेस स्ट्रक्चर की भी जांच की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
10 दिन में दूसरी बड़ी घटना
ताजा दरारों का मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह पिछले कुछ दिनों में सामने आई दूसरी बड़ी समस्या बताई जा रही है। इससे पहले भी बारिश के बाद सड़क के हिस्से में धंसाव और गड्ढे की स्थिति सामने आई थी।
इसके बाद किए गए पैचवर्क में फिर दरारें आने से लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर मरम्मत के बावजूद सड़क बार-बार क्यों प्रभावित हो रही है।
पहले भी सामने आई थीं कई दिक्कतें
गंगा एक्सप्रेसवे के उन्नाव हिस्से में इससे पहले भी बारिश के बाद सड़क किनारे मिट्टी कटने और ढलान से जुड़ी समस्याएं सामने आई थीं। अगस्त में किलोमीटर 421-422 के आसपास एक्सपेंशन ज्वाइंट के पास दरार की भी रिपोर्ट आई थी।
इसके अलावा बशीरतगंज टोल से एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली सड़क के मरम्मत किए गए हिस्से में भी बारिश के बाद दोबारा नुकसान की जानकारी सामने आई थी।
36 हजार करोड़ से ज्यादा की परियोजना
गंगा एक्सप्रेसवे करीब 594 किलोमीटर लंबा छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे है, जो मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक, परियोजना की लागत करीब ₹36,230 करोड़ है और इसका उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को किया गया था।
इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण परियोजना के उद्घाटन के कुछ समय बाद ही अलग-अलग हिस्सों में सड़क से जुड़ी समस्याएं सामने आने के कारण इसकी गुणवत्ता और टिकाऊपन पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
अब जांच और स्थायी समाधान की जरूरत
बारिश के बाद दोबारा दरारें आने से सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल ऊपरी सतह पर पैचवर्क करना पर्याप्त है या सड़क के नीचे की संरचना और पानी की निकासी व्यवस्था की भी विस्तृत जांच जरूरी है।
विशेषज्ञ स्तर पर जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दरारों की वास्तविक वजह क्या है और भविष्य में ऐसी समस्या को रोकने के लिए किस तरह का स्थायी समाधान जरूरी होगा।
फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे पर दोबारा सामने आई दरारों ने निर्माण और मरम्मत की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। बारिश के दौरान लगातार सामने आ रही समस्याओं को देखते हुए अब निगाहें संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई और सड़क की तकनीकी जांच पर हैं।







