पिछले कुछ वर्षों में भारत समेत दुनिया भर में देर से माता-पिता बनने (Late Parenthood) का चलन तेजी से बढ़ा है। जहां पहले लोग 25 से 30 वर्ष की उम्र के बीच परिवार बढ़ाने का फैसला लेते थे, वहीं अब कई दंपति 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में माता-पिता बनना पसंद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे करियर, आर्थिक स्थिरता, बदलती जीवनशैली और व्यक्तिगत प्राथमिकताएं जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं। हालांकि, देर से माता-पिता बनने के अपने फायदे हैं, लेकिन इससे कुछ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, आज के समय में युवा पहले अपने करियर को मजबूत करना चाहते हैं। उच्च शिक्षा, बेहतर नौकरी, आर्थिक सुरक्षा और जीवन में स्थिरता हासिल करने के बाद ही अधिकांश लोग परिवार बढ़ाने का निर्णय लेते हैं। इसके अलावा, बढ़ती महंगाई, घर खरीदने की योजना और बच्चों की परवरिश का बढ़ता खर्च भी इस फैसले को प्रभावित करता है।
सामाजिक बदलाव भी इस प्रवृत्ति का एक बड़ा कारण हैं। पहले जहां कम उम्र में शादी और परिवार शुरू करना सामान्य माना जाता था, वहीं अब लोग अपनी पसंद, करियर और व्यक्तिगत जीवन को अधिक महत्व देने लगे हैं। कई दंपति पहले एक-दूसरे को बेहतर समझने और जीवन को व्यवस्थित करने के बाद ही माता-पिता बनने का फैसला लेते हैं।
हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ प्रजनन क्षमता (Fertility) धीरे-धीरे कम होने लगती है। विशेष रूप से महिलाओं में 35 वर्ष की उम्र के बाद गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है और गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes), समय से पहले प्रसव तथा अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं पुरुषों में भी बढ़ती उम्र का असर शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
इसके बावजूद विशेषज्ञ यह स्पष्ट करते हैं कि आज आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण अधिक उम्र में भी स्वस्थ गर्भावस्था संभव है। यदि दंपति समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं, डॉक्टर की सलाह लें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, तो कई जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि यदि कोई दंपति भविष्य में माता-पिता बनने की योजना बना रहा है, तो उन्हें पहले से प्री-कॉन्सेप्शन काउंसलिंग (Preconception Counseling) करानी चाहिए। इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण, धूम्रपान और शराब से दूरी जैसी आदतें अपनानी चाहिए। यदि गर्भधारण में कठिनाई हो रही हो, तो बिना देरी किए प्रजनन विशेषज्ञ (Fertility Specialist) से संपर्क करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता बनने का निर्णय पूरी तरह व्यक्तिगत होता है और हर दंपति की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए केवल सामाजिक दबाव या बढ़ती उम्र को देखकर घबराने के बजाय सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण है। उचित योजना, समय पर जांच और आधुनिक चिकित्सा की मदद से देर से माता-पिता बनने के बावजूद स्वस्थ गर्भावस्था और स्वस्थ शिशु की संभावना बेहतर बनाई जा सकती है।








