सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की लंबी भूख हड़ताल के बीच उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को शनिवार को तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंची। बताया जा रहा है कि लगातार कई दिनों तक भोजन न करने के कारण उनके शरीर में डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दिए। हालांकि अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्होंने इलाज लेने से इनकार कर दिया, जिससे डॉक्टरों की चिंता और बढ़ गई।
जानकारी के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान वांगचुक की शारीरिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही थी। मौके पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने उनकी जांच की, जिसमें शरीर में पानी की कमी और कमजोरी के संकेत मिले। इसके बाद दिल्ली पुलिस उन्हें एहतियात के तौर पर सफदरजंग अस्पताल ले गई ताकि उनका तत्काल मेडिकल परीक्षण और उपचार किया जा सके।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टरों ने सोनम वांगचुक को मेडिकल जांच और आवश्यक उपचार की सलाह दी, लेकिन उन्होंने उपचार कराने से स्पष्ट इनकार कर दिया। चिकित्सकों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित इलाज नहीं मिला, तो उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल करने से शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और इससे जान का खतरा भी बढ़ सकता है।
इस बीच रविवार सुबह वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल की ओर से सोनम वांगचुक का हेल्थ अपडेट जारी किया गया। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि उन्हें आवश्यक चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है। फिलहाल उनके जरूरी स्वास्थ्य मानक (Vital Parameters) स्थिर हैं, लेकिन ब्लड पैरामीटर्स में कुछ बदलाव दर्ज किए गए हैं, जो लंबे समय तक भोजन न करने के कारण हो सकते हैं।
अस्पताल ने अपने बयान में कहा कि भूख हड़ताल के कारण शरीर पर लगातार बढ़ रहे तनाव को देखते हुए सोनम वांगचुक को विशेषज्ञ डॉक्टरों की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम की निगरानी में रखा गया है। टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप के लिए तैयार है।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके समर्थन में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपनी आवाज उठा रहे हैं। इस बीच उनकी गिरती सेहत ने समर्थकों और सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। कई लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है तथा प्रशासन से उचित कदम उठाने की अपील की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल करने से शरीर में ग्लूकोज, इलेक्ट्रोलाइट्स और जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इससे डिहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर में गिरावट, कमजोरी, चक्कर आना, किडनी और अन्य अंगों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ऐसी स्थिति में नियमित मेडिकल जांच और चिकित्सकीय निगरानी बेहद जरूरी होती है।
फिलहाल सोनम वांगचुक की स्थिति पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर रखे हुए है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनकी हालत अभी स्थिर है, लेकिन लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने की स्थिति में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। वहीं, यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि वांगचुक इलाज के लिए सहमति देते हैं, तो उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जाएंगी।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सोनम वांगचुक आगे अपना आंदोलन जारी रखते हैं या स्वास्थ्य को देखते हुए चिकित्सा उपचार स्वीकार करते हैं। वहीं डॉक्टरों ने एक बार फिर अपील की है कि उनकी सेहत को प्राथमिकता देते हुए समय पर इलाज लेना बेहद जरूरी है।








