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July 1, 2026 1:29 pm

मॉनसून पर मंडराया अल नीनो का साया, बारिश कम और महंगाई ज्यादा होने की आशंका

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देश में मॉनसून को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है, क्योंकि मौसम वैज्ञानिकों ने अल नीनो की संभावित स्थिति को देखते हुए बारिश के सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया है। इसके चलते न केवल कृषि उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है, बल्कि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने का खतरा भी जताया जा रहा है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर के सतही तापमान में असामान्य वृद्धि होती है। इसका सीधा असर वैश्विक मौसम पैटर्न पर पड़ता है और भारत में मॉनसून की बारिश कमजोर हो सकती है। यदि यह स्थिति सक्रिय रहती है, तो कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा सकती है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। धान, मक्का, दालें और तिलहन जैसी प्रमुख फसलें मानसून की बारिश पर आधारित होती हैं। ऐसे में यदि बारिश कम होती है, तो उत्पादन घट सकता है और बाजार में खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने लगती हैं। इससे सीधे तौर पर आम जनता की जेब पर असर पड़ता है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कम बारिश की स्थिति में सब्जियों, अनाज और दालों की कीमतों में तेजी आ सकती है। पहले से ही कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और यदि मॉनसून कमजोर रहता है तो महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है, क्योंकि किसानों की आय घट सकती है।

हालांकि, मौसम विभाग ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अल नीनो की स्थिति कितनी मजबूत होगी और इसका प्रभाव किस स्तर तक पड़ेगा। विभाग का कहना है कि आने वाले हफ्तों में मौसम के पैटर्न पर करीब से नजर रखी जा रही है और उसी के आधार पर अपडेट जारी किए जाएंगे।

सरकारी एजेंसियां भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कृषि मंत्रालय और संबंधित विभाग संभावित कम बारिश को देखते हुए वैकल्पिक योजनाओं पर विचार कर रहे हैं, ताकि किसानों को किसी बड़े नुकसान से बचाया जा सके। सिंचाई व्यवस्था, जल संरक्षण और फसल विविधीकरण जैसे उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अल नीनो का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी देखा जाता है। कई देशों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश भी हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति और कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।

फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन अल नीनो की आशंका ने मौसम विभाग, कृषि क्षेत्र और आर्थिक विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। यदि आने वाले महीनों में बारिश सामान्य से कम रहती है, तो इसका असर सीधे तौर पर देश की खाद्य सुरक्षा और महंगाई दर पर देखने को मिल सकता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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