रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। यूक्रेन ने रूस के भीतर गहरे इलाकों में स्थित कई रणनीतिक ठिकानों पर लंबी दूरी के ड्रोन और अन्य हथियारों से हमला करने का दावा किया है। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान में रूस के ऑयल डिपो, केमिकल प्लांट और अन्य सैन्य आपूर्ति से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद कई स्थानों पर आग लगने की खबरें सामने आई हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें बड़े पैमाने पर आग और धुएं के गुबार दिखाई दे रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन अपने नागरिकों और बुनियादी ढांचे पर हो रहे रूसी हमलों का जवाब देने में सक्षम है और देश की सुरक्षा के लिए ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि, साझा किए गए वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
यूक्रेन का कहना है कि जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, वे रूस की सैन्य आपूर्ति और ईंधन लॉजिस्टिक्स के लिए महत्वपूर्ण थे। इन सुविधाओं का उपयोग कथित तौर पर सेना को ईंधन, रसायन और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में किया जाता है। यदि इन प्रतिष्ठानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, तो इसका असर रूस की सैन्य आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, रूस के रक्षा मंत्रालय ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने कई ड्रोन मार गिराए, हालांकि कुछ स्थानों पर नुकसान और आग लगने की घटनाओं की भी पुष्टि की गई है। नुकसान की वास्तविक सीमा को लेकर दोनों देशों के दावों में अंतर बना हुआ है और स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस के अंदर स्थित ईंधन डिपो, हथियार भंडार और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की रणनीति तेज की है। इसका उद्देश्य रूस की युद्ध क्षमता, सैन्य रसद और ईंधन आपूर्ति को प्रभावित करना है। जवाब में रूस भी यूक्रेन के शहरों, ऊर्जा ढांचे और सैन्य ठिकानों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है।
लगातार बढ़ते इन हमलों से दोनों देशों के बीच संघर्ष और अधिक जटिल होता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने एक बार फिर दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। फिलहाल युद्ध के मोर्चे पर तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं और आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।








