Explore

Search

June 25, 2026 1:40 pm

4 महीने के निचले स्तर पर कच्चा तेल, US-ईरान समझौते के बाद कीमतों में बड़ी गिरावट

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चार महीने में पहली बार कच्चे तेल का भाव 75 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया। ताजा कारोबारी सत्र में क्रूड ऑयल की कीमत करीब 3.1 प्रतिशत गिरकर 74.73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। बाजार विशेषज्ञ इस गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी और संभावित समझौते की दिशा में बढ़ते कदमों को मान रहे हैं।

तेल बाजार में आई इस नरमी ने दुनिया भर के निवेशकों और तेल आयातक देशों को राहत दी है। पिछले कुछ सप्ताह से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही थी। हालांकि हालिया घटनाक्रम के बाद बाजार की धारणा में बदलाव आया है और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

US-ईरान समझौते का दिखा असर

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में सकारात्मक संकेत मिलने से बाजार में यह उम्मीद जगी है कि क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है। यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध बेहतर होते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे जोखिम भी कम होंगे।

तेल बाजार हमेशा भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशील रहता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार की सहमति या तनाव में कमी का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई देता है। निवेशकों ने संभावित आपूर्ति बाधाओं की आशंका कम होने के बाद तेल की खरीदारी घटा दी, जिससे कीमतों में गिरावट दर्ज हुई।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना रहा चर्चा का केंद्र

दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 1.9 करोड़ बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन होता है। यह मार्ग फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है और कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों के लिए जीवनरेखा माना जाता है।

हाल के दिनों में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका ने बाजार को चिंतित कर दिया था। लेकिन अब यह संकेत मिलने के बाद कि समुद्री यातायात सामान्य बना हुआ है और तेल आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई है, बाजार में राहत का माहौल देखने को मिला है।

भारत समेत आयातक देशों को राहत

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए सकारात्मक खबर मानी जा रही है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने से आयात बिल कम हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतों में यह नरमी आगे भी बनी रहती है, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की लागत, महंगाई दर और सरकारी वित्तीय प्रबंधन पर भी सकारात्मक रूप से पड़ सकता है। इससे परिवहन और औद्योगिक क्षेत्रों को भी राहत मिलने की संभावना है।

निवेशकों की नजर आगे की घटनाओं पर

हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि तेल बाजार में उतार-चढ़ाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अमेरिका-ईरान संबंधों, मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक मांग जैसे कारक आगे भी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

यदि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है। वहीं किसी नए भू-राजनीतिक तनाव या आपूर्ति संकट की स्थिति में बाजार फिर से तेजी की ओर लौट सकता है।

फिलहाल, चार महीने के निचले स्तर पर पहुंचा कच्चा तेल वैश्विक बाजारों के लिए राहत का संकेत माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियों ने निवेशकों की चिंता कम की है और ऊर्जा बाजार में स्थिरता की उम्मीद को मजबूत किया है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर