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June 24, 2026 12:46 pm

‘कोई समझौता नहीं होगा’, शांति वार्ता के बीच ईरान पर फिर भड़के ट्रंप, परमाणु कार्यक्रम पर सख्त चेतावनी

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पूरी पारदर्शिता नहीं दिखाता, तब तक किसी भी प्रकार का समझौता संभव नहीं होगा। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

ट्रंप ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अमेरिका ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं है, जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दुनिया को यह जानने का अधिकार है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों पर क्या गतिविधियां चला रहा है और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को वहां पूरी पहुंच मिलनी चाहिए।

परमाणु जांच को लेकर सख्त संदेश

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों के साथ पूर्ण सहयोग करना होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर सवालों के जवाब नहीं दिए और निरीक्षण प्रक्रिया में बाधा डाली, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि “हम शांति चाहते हैं, लेकिन शांति का मतलब कमजोरी नहीं है। अगर ईरान नियमों का पालन नहीं करता तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।”

शांति वार्ता के बीच बढ़ा तनाव

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बातचीत जारी है। कई देशों की कोशिश है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम किया जाए और परमाणु मुद्दे का समाधान कूटनीतिक माध्यमों से निकाला जाए।

हालांकि ट्रंप के सख्त तेवरों ने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन अभी भी ईरान के इरादों को लेकर आश्वस्त नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान से वार्ता प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है और दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली की कोशिशों को झटका लग सकता है।

ईरान का पलटवार

ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वे अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत काम कर रहे हैं। तेहरान ने अमेरिका पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि दबाव और धमकियों से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा।

ईरानी नेताओं का कहना है कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रगति से जुड़े मामलों में किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

वैश्विक समुदाय की नजर

ट्रंप के बयान के बाद संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देशों ने संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय चाहता है कि दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान खोजें ताकि क्षेत्र में किसी नए सैन्य या राजनीतिक संकट की स्थिति न बने।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का परमाणु मुद्दा केवल अमेरिका और ईरान के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर दुनिया की नजरें लगातार टिकी हुई हैं।

आगे क्या?

फिलहाल ट्रंप के सख्त बयान ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण और पारदर्शिता को लेकर क्या कदम उठाता है और क्या दोनों देशों के बीच जारी वार्ताएं किसी सकारात्मक नतीजे तक पहुंच पाती हैं।

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ट्रंप का यह अल्टीमेटम आने वाले समय में अमेरिका-ईरान संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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