नई दिल्ली। अक्सर लोग एलर्जी को एक सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हर एलर्जी हल्की नहीं होती। कुछ मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसी गंभीर स्थिति को मेडिकल भाषा में एनाफिलैक्सिस (Anaphylaxis) कहा जाता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी होती है और समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एनाफिलैक्सिस शरीर की इम्यून सिस्टम की एक तेज और गंभीर प्रतिक्रिया होती है, जो किसी एलर्जेन (allergen) के संपर्क में आने के कुछ ही मिनटों में शुरू हो सकती है। यह एलर्जेन खाने-पीने की चीजें, दवाइयां, कीड़े का काटना या धूल-मिट्टी कुछ भी हो सकता है।
क्या है एनाफिलैक्सिस?
एनाफिलैक्सिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम ओवररिएक्ट करता है और कई अंगों पर एक साथ असर डालता है। इससे सांस लेने में दिक्कत, ब्लड प्रेशर गिरना, त्वचा पर रैशेज, सूजन और बेहोशी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति अचानक शुरू होती है और तेजी से बिगड़ सकती है, इसलिए इसे “मेडिकल इमरजेंसी” माना जाता है।
इसके लक्षण क्या हैं?
एनाफिलैक्सिस के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- अचानक त्वचा पर लाल चकत्ते या खुजली
- चेहरे, होंठ या गले में सूजन
- सांस लेने में कठिनाई या घरघराहट
- चक्कर आना या बेहोशी
- तेज दिल की धड़कन
- उल्टी या पेट दर्द
कब हो सकती है जानलेवा स्थिति?
यदि समय पर इलाज न मिले तो एनाफिलैक्सिस शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। इससे ब्लड प्रेशर बहुत तेजी से गिर सकता है और मरीज शॉक में चला जाता है। ऐसे मामलों में तुरंत इलाज न मिलने पर जान जाने का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों को पहले से किसी चीज से एलर्जी है, उन्हें बेहद सावधानी रखनी चाहिए। डॉक्टर अक्सर ऐसे मरीजों को एपिनेफ्रिन (Adrenaline) ऑटो-इंजेक्टर साथ रखने की सलाह देते हैं, जिससे इमरजेंसी स्थिति में तुरंत राहत मिल सके।
डॉक्टरों का यह भी कहना है कि एलर्जी को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए और शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
- फूड एलर्जी वाले लोग
- अस्थमा के मरीज
- कीड़े के काटने से एलर्जी वाले लोग
- दवाइयों से एलर्जी वाले मरीज
निष्कर्ष
एलर्जी को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। एनाफिलैक्सिस जैसी स्थिति कभी भी गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए जागरूकता, समय पर पहचान और सही इलाज ही इस स्थिति से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है। डॉक्टरों की सलाह है कि हाई-रिस्क मरीज हमेशा सतर्क रहें और जरूरी इमरजेंसी दवाएं अपने पास रखें।








