देश में मौसम का मिजाज इस समय पूरी तरह असामान्य बना हुआ है। जहां जून का महीना आमतौर पर मानसून की तेज शुरुआत और अच्छी बारिश के लिए जाना जाता है, वहीं इस साल हालात इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं। मौसम विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इस जून में अब तक सामान्य से करीब 42% कम बारिश दर्ज की गई है। इसी के साथ यह जून देश के इतिहास का दूसरा सबसे सूखा जून बन गया है।
एक तरफ मानसून की धीमी रफ्तार ने चिंता बढ़ा दी है, तो दूसरी तरफ कुछ राज्यों में अचानक ओलावृष्टि और कई इलाकों में भीषण हीटवेव ने मौसम को और भी ज्यादा असंतुलित बना दिया है।
बारिश में भारी गिरावट, मानसून की चाल धीमी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल मानसून की प्रगति उम्मीद से काफी कमजोर रही है। सामान्य तौर पर जून के मध्य तक देश के बड़े हिस्से में अच्छी बारिश हो जाती है, लेकिन इस बार कई राज्यों में बारिश की भारी कमी देखने को मिली है।
इस कमी का सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। खरीफ फसलों की बुवाई के लिए जरूरी नमी नहीं मिल पा रही है, जिससे किसान वर्ग की चिंता बढ़ गई है। कई इलाकों में खेत सूखे पड़े हैं और बुवाई का काम रुक गया है।
राजस्थान में अचानक मौसम बदला, गिरे ओले
इसी बीच राजस्थान के कुछ हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली और तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि दर्ज की गई। कुछ ही मिनटों में आसमान में काले बादल छा गए और फिर तेज हवाओं के साथ ओले गिरने लगे।
इस ओलावृष्टि ने जहां कुछ समय के लिए गर्मी से राहत दी, वहीं फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में स्थिति का आकलन शुरू कर दिया है।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में हीटवेव का कहर
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी ने लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने दोनों राज्यों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है।
दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है। दोपहर के समय सड़कें सुनसान दिखाई दे रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है और बिना जरूरत बाहर न निकलने की चेतावनी दी है।
मौसम में इतनी असमानता क्यों?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की स्थिति वायुमंडलीय दबाव, समुद्री सतह के तापमान में बदलाव और मानसूनी हवाओं की अनियमितता के कारण बनती है। कभी-कभी देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही समय पर बिल्कुल विपरीत मौसम देखने को मिलता है—कहीं सूखा, कहीं तेज बारिश और कहीं भीषण गर्मी।
इस साल भी यही असंतुलन साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।
कृषि और जनजीवन पर असर
कम बारिश और बढ़ती गर्मी का सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। इसके साथ ही बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ गई है क्योंकि लोग गर्मी से राहत पाने के लिए कूलर और एसी का अधिक उपयोग कर रहे हैं।
इससे बिजली आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है और कई जगहों पर कटौती की भी स्थिति देखी जा रही है।
आगे क्या हालात रहेंगे?
मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है और कुछ क्षेत्रों में बारिश बढ़ने की संभावना है। हालांकि फिलहाल देश के कई हिस्सों में मौसम की अनिश्चितता बनी रहेगी।
निष्कर्ष
देश इस समय एक असामान्य मौसम चक्र से गुजर रहा है। एक ओर रिकॉर्ड के करीब पहुंचता सूखा जून, तो दूसरी ओर अचानक ओलावृष्टि और भीषण हीटवेव—यह सब मिलकर मौसम को बेहद अस्थिर बना रहे हैं। इसका असर केवल खेती पर ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अब सभी की नजरें मानसून की वापसी और आने वाले दिनों के मौसम बदलाव पर टिकी हैं।








