घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस हफ्ते कीमती धातुओं पर दबाव देखने को मिला है। लगातार उतार-चढ़ाव के बीच सोना और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों को झटका लगा है। खासकर चांदी में आई तेज गिरावट ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
चांदी में बड़ी गिरावट
जानकारी के अनुसार, इस हफ्ते चांदी की कीमतों में लगभग ₹10,609 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद चांदी का भाव घटकर करीब ₹2.32 लाख प्रति किलो पर पहुंच गया है। यह गिरावट लगातार बिकवाली दबाव और वैश्विक मांग में नरमी के चलते देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में औद्योगिक मांग कमजोर होने और डॉलर की मजबूती के कारण चांदी पर दबाव बढ़ा है।
सोने की कीमतों में भी गिरावट
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। इस हफ्ते सोना लगभग ₹2,830 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ है। घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में यह गिरावट निवेशकों और ज्वेलरी कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक संकेतों, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और मुनाफावसूली (profit booking) की वजह से सोने में यह कमजोरी देखने को मिली है।
क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के दाम?
विश्लेषकों का कहना है कि कीमती धातुओं के दामों में गिरावट के पीछे कई कारण हैं:
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स का मजबूत होना
- वैश्विक आर्थिक संकेतों में अनिश्चितता
- निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली
- औद्योगिक मांग में अस्थायी कमी (विशेषकर चांदी में)
इन सभी कारणों ने मिलकर इस हफ्ते सोना-चांदी के बाजार पर दबाव बनाया है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट को लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी माना जा सकता है, हालांकि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव अभी जारी रह सकते हैं। बाजार की दिशा आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निर्भर करेगी।
आगे क्या रहेगा रुझान?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरों में कटौती के संकेत मिलते हैं, तो सोने-चांदी में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, डॉलर मजबूत रहने पर कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
निष्कर्ष
इस हफ्ते सोना-चांदी दोनों में आई गिरावट ने एक बार फिर साबित किया है कि कीमती धातुओं का बाजार वैश्विक परिस्थितियों से काफी प्रभावित होता है। फिलहाल निवेशकों की नजर आने वाले आर्थिक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान पर टिकी हुई है।








