देश में मानसून की रफ्तार इस बार फिर सुस्त पड़ गई है। मौसम विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मानसून 8 जून से लगभग ठहरा हुआ है और आगे बढ़ने में लगातार देरी हो रही है। इसके चलते देशभर में अब तक सामान्य से करीब 37.8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे कई राज्यों में गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह लगातार तीसरा साल है जब मानसून की शुरुआत और उसकी प्रगति में लंबा ब्रेक देखा जा रहा है। आमतौर पर जून के मध्य तक देश के बड़े हिस्से में मानसून सक्रिय हो जाता है, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग बनी हुई हैं।
उत्तर भारत में अभी और इंतजार
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में मानसून की एंट्री 22 जून के बाद ही होने की संभावना है। इसका मतलब है कि उत्तर भारत को अभी बारिश के लिए कुछ और दिन इंतजार करना पड़ सकता है।
इस देरी का सीधा असर तापमान पर भी देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में दिन का तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है और उमस ने लोगों को परेशान कर रखा है। बिजली की खपत भी बढ़ गई है क्योंकि लोग गर्मी से राहत के लिए कूलर और एसी पर निर्भर हैं।
किसानों की चिंता बढ़ी
मानसून की देरी का सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन गई है। खेतों की बुवाई का समय नजदीक है, लेकिन बारिश न होने से कई जगहों पर तैयारी प्रभावित हो रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसून की यही स्थिति बनी रही तो धान और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
लगातार तीसरे साल मानसून की सुस्ती
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पैटर्न लगातार तीसरे साल देखने को मिल रहा है, जहां मानसून की शुरुआत धीमी रही है और उसमें लंबे ब्रेक आए हैं। इसके पीछे समुद्री तापमान में बदलाव, हवाओं की दिशा और वैश्विक जलवायु परिवर्तन जैसे कारण बताए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की अनियमितता अब एक सामान्य प्रवृत्ति बनती जा रही है, जो आने वाले समय में और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
गर्मी और उमस से बेहाल लोग
मानसून के अटकने का सीधा असर आम जनजीवन पर भी पड़ रहा है। कई शहरों में लोग तेज गर्मी और उमस से परेशान हैं। दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम हो रही है और लोग घरों में ही रहने को मजबूर हैं।
मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश की संभावना जरूर जताई है, लेकिन बड़े पैमाने पर मानसून की सक्रियता अभी दूर नजर आ रही है।
आगे क्या?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में परिस्थितियों में बदलाव संभव है और मानसून धीरे-धीरे उत्तर और मध्य भारत की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, इसकी गति और समय को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
फिलहाल पूरे देश की नजर मानसून की अगली चाल पर टिकी है, क्योंकि इससे न केवल गर्मी से राहत मिलेगी बल्कि कृषि और अर्थव्यवस्था दोनों पर बड़ा असर पड़ेगा।








