दिल्ली की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार माने जाने वाले संदीप पाठक को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं, जिससे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ‘सियासी मशीन’ पर असर पड़ता दिख रहा है।
संदीप पाठक को लंबे समय से AAP का “बैकएंड ब्रेन” माना जाता रहा है। चुनावी रणनीति तैयार करने से लेकर संगठन को मजबूत करने तक, उनकी भूमिका अहम रही है। पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में पार्टी के विस्तार के पीछे भी उनकी रणनीति को बड़ी वजह माना गया था। लेकिन अब पार्टी के भीतर और बाहर, दोनों जगह उनकी कार्यशैली और फैसलों पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, संगठन के अंदर कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा है। उनका मानना है कि फैसले लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और कुछ अहम निर्णय सीमित दायरे में ही लिए जा रहे हैं। इससे जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है।
वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी पार्टी की मजबूती उसके संगठन और रणनीति पर निर्भर करती है। अगर रणनीतिकार पर ही सवाल उठने लगें, तो इसका सीधा असर पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में, जब AAP राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, इस तरह के विवाद पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं।
हालांकि, AAP की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ अंदरूनी मतभेद हैं, जिन्हें जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। वे इसे विपक्ष द्वारा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने का आरोप भी लगा रहे हैं।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद पार्टी के भीतर ही सिमट कर रह जाता है या फिर इसका असर चुनावी राजनीति पर भी पड़ता है। फिलहाल इतना तय है कि AAP के लिए यह दौर आसान नहीं दिख रहा और पार्टी नेतृत्व को संगठन को एकजुट बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।







