तेहरान की दो टूक—परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं, मुनीर लौटे खाली हाथ
ईरान की राजधानी तेहरान में तीन दिनों तक चली कूटनीतिक हलचल आखिरकार बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। मुनीर के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान से बातचीत में नरमी लाने की कोशिश की, लेकिन तेहरान ने साफ शब्दों में अपने रुख को दोहराते हुए किसी भी तरह के समझौते से इनकार कर दिया।
दौरे के दौरान कई दौर की बातचीत हुई, जिनमें क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों और परमाणु गतिविधियों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। हालांकि, हर बैठक के बाद यही संकेत मिले कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले की तरह ही अडिग है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि उनका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वे इसे किसी भी बाहरी दबाव में आकर बंद या सीमित नहीं करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, मुनीर ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय दबाव और संभावित प्रतिबंधों के जोखिम से आगाह किया, लेकिन तेहरान ने इसे अपनी संप्रभुता का मामला बताते हुए किसी भी तरह की शर्त मानने से इनकार कर दिया। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में है और वह अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा उम्मीदों के विपरीत रहा और इससे दोनों पक्षों के बीच मतभेद और स्पष्ट हो गए हैं। मुनीर की यह कोशिश थी कि बातचीत के जरिए कोई मध्य मार्ग निकले, लेकिन तेहरान के कड़े रुख ने सारी संभावनाओं पर विराम लगा दिया।
इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में नई हलचल की संभावना जताई जा रही है। जहां एक ओर पश्चिमी देशों की नजरें ईरान की गतिविधियों पर टिकी हैं, वहीं दूसरी ओर इस असफल दौरे ने कूटनीतिक प्रयासों की सीमाओं को भी उजागर कर दिया है।
कुल मिलाकर, तीन दिवसीय यह दौरा “ढाक के तीन पात” साबित हुआ, जिसमें न तो कोई समझौता हो पाया और न ही ईरान अपने रुख से टस से मस हुआ। मुनीर को खाली हाथ लौटना पड़ा, जबकि तेहरान ने एक बार फिर दुनिया को अपना स्पष्ट संदेश दे दिया है।







