बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मंत्रिमंडल में विभागों का औपचारिक बंटवारा कर दिया गया है, जिससे राज्य की सियासी और प्रशासनिक तस्वीर साफ हो गई है। इस पोर्टफोलियो वितरण में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास सबसे ज्यादा मंत्रालयों की जिम्मेदारी रखी गई है, जबकि सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) को 18 विभाग सौंपे गए हैं।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह, सामान्य प्रशासन, कैबिनेट सचिवालय, राजस्व एवं भूमि सुधार, स्वास्थ्य, पथ निर्माण, कृषि, नगर विकास, उद्योग और आपदा प्रबंधन जैसे कई अहम विभाग अपने पास रखे हैं। इसे सरकार की प्रमुख नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर सीधे नियंत्रण की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं, JDU के मंत्रियों को भी सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। पार्टी को कुल 18 मंत्रालयों का प्रभार मिला है, जिनमें शिक्षा, ग्रामीण विकास, जल संसाधन, संसदीय कार्य और सूचना एवं जनसंपर्क जैसे अहम विभाग शामिल हैं। इसके अलावा वित्त, ऊर्जा और समाज कल्याण जैसे विभागों में भी सहयोगी दलों की भूमिका तय की गई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विभागीय बंटवारा सत्ता संतुलन और प्रशासनिक स्थिरता को ध्यान में रखकर किया गया है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री के पास अधिक विभाग होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर JDU को दिए गए विभाग सरकार के संचालन में संतुलन बनाए रखने में मदद करेंगे।
इस बीच मंत्रालयों के बंटवारे के बाद राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कई नेता मुख्यमंत्री से मुलाकात करने पहुंचे, जिनमें विजय सिन्हा समेत बीजेपी और JDU के कई विधायक शामिल रहे। इन बैठकों को नए राजनीतिक समीकरण और प्रशासनिक प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर विभागों का वितरण सरकार की कार्यशैली को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। मुख्यमंत्री के पास अधिक जिम्मेदारियां होने से जहां मजबूत नियंत्रण का संकेत मिलता है, वहीं कार्यभार का दबाव भी बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, बिहार कैबिनेट का यह पोर्टफोलियो बंटवारा राज्य की राजनीति में नए संतुलन की ओर इशारा करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नई व्यवस्था शासन और विकास कार्यों पर कितना प्रभाव डालती है।







