पश्चिम बंगाल में भाषा को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। Kolkata Mayor के एक बयान—जिसमें ‘बंगाल में उर्दू बोलनी है तो…’ जैसी टिप्पणी सामने आई—पर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए अपनी साफ और दो टूक राय रखी है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर नागरिक को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा के अनुसार जीने का पूरा अधिकार है। उन्होंने इशारों-इशारों में इस तरह के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी राज्य या समाज में भाषा के आधार पर भेदभाव करना न केवल संविधान की भावना के खिलाफ है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाता है।
उन्होंने आगे कहा कि देश की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और अलग-अलग भाषाएं इस विविधता को और समृद्ध बनाती हैं। ऐसे में किसी भी भाषा को लेकर विवाद खड़ा करना या उसे राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है। योगी ने जोर देकर कहा कि सरकारों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को जोड़ने का काम करें, न कि बांटने का।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज हो गई है। एक ओर जहां कुछ नेता योगी के बयान का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसे राजनीतिक बयानबाज़ी करार दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भाषा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर इस तरह के बयान अक्सर बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लेते हैं। West Bengal जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक राज्य में यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो जाता है, जहां अलग-अलग भाषाएं और संस्कृतियां एक साथ विकसित होती रही हैं।
फिलहाल, यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है और आने वाले दिनों में इस पर और भी राजनीतिक बयानबाज़ी देखने को मिल सकती है। अब देखना होगा कि यह मुद्दा सिर्फ बयान तक सीमित रहता है या फिर कोई बड़ा राजनीतिक रूप लेता है।







