जयपुर, 8 मार्च 2026: राजस्थान विधानसभा में हाल ही में पारित ‘डिस्टर्ब एरिया बिल-2026’ (राजस्थान प्रतिबंध ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026) के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी ने ऐलान किया है कि वह इस बिल को सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के साथ-साथ कोर्ट में चुनौती देगी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
विधानसभा में शुक्रवार (6 मार्च) को ध्वनि मत से पारित इस बिल के तहत सरकार किसी क्षेत्र को ‘डिस्टर्ब एरिया’ घोषित कर सकती है, जहां दंगा, सांप्रदायिक तनाव या जनसांख्यिकीय असंतुलन (improper clustering) की आशंका हो। ऐसे इलाकों में संपत्ति खरीद-फरोख्त के लिए जिला कलेक्टर या प्रशासन की पूर्व अनुमति जरूरी होगी, ताकि ‘डिस्ट्रेस सेल’ (जबरन या सस्ते में बिक्री) और जबरन विस्थापन रोका जा सके। बिल का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव बनाए रखना और किराएदारों को बेदखली से बचाना बताया गया है, लेकिन कांग्रेस इसे संविधान विरोधी और धार्मिक विभाजन फैलाने वाली साजिश करार दे रही है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सदन में बहस के दौरान कहा, “यह गुजरात मॉडल की कॉपी है, जिससे समाज में बंटवारा बढ़ेगा। 2028 में कांग्रेस सत्ता में आई तो इस बिल को तुरंत खत्म कर देंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि बिल से भ्रष्टाचार के रास्ते खुलेंगे और लोगों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होंगे।
राजस्थान कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष एम.डी. चौपदार ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह बिल संविधान की भावना के खिलाफ है। हमारी लीगल टीम बिल का गहन अध्ययन कर रही है। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही हम सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे। प्रदेश भर में आंदोलन भी तेज किया जाएगा।” उन्होंने बताया कि कुछ संगठनों (जैसे बौद्ध और ईसाई समाज) की ओर से पहले से ही संबंधित याचिकाएं लंबित हैं, जिन पर जल्द सुनवाई हो सकती है।
बिल के समर्थकों का कहना है कि यह कानून गुजरात की तरह ही प्रभावी होगा, जहां ऐसी व्यवस्था से जबरन संपत्ति हड़पने की घटनाएं रुकी हैं। लेकिन विपक्ष का दावा है कि इससे अल्पसंख्यक समुदायों में डर का माहौल बनेगा और सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचेगा।
वर्तमान में बिल राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। यदि मंजूर होता है, तो कांग्रेस के विरोध और कानूनी चुनौती से यह मुद्दा और गरमा सकता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, उच्चाधिकारी इस विवाद को गंभीरता से ले रहे हैं और स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।






