होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हालिया हमलों के जवाब में ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि कोई भी जहाज होर्मुज से नहीं गुजर सकता। हालांकि यह आधिकारिक रूप से “पूर्ण बंद” नहीं घोषित किया गया, लेकिन बीमा कंपनियों, टैंकर मालिकों और प्रमुख तेल कंपनियों ने सावधानी के तौर पर आवाजाही रोक दी है। सैकड़ों तेल और गैस टैंकर खाड़ी में लंगर डाले खड़े हैं, जिससे यह मार्ग प्रभावी रूप से बंद हो चुका है।
दुनिया का 20% से अधिक कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस (LNG/LPG) इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। इस घटना के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है:
- ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 8-12% तक उछलकर 72-80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं।
- विश्लेषकों (जैसे Citi, Wood Mackenzie, Bloomberg) का अनुमान है कि अगर यह स्थिति कुछ दिनों से अधिक चली तो कीमतें 90-100 डॉलर या उससे भी ऊपर (कुछ रिपोर्टों में $108 तक) जा सकती हैं।
- लंबे समय तक बंदी बनी रही तो यह 1970 के दशक जैसा ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ रहा है और पड़ सकता है?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, और इसकी ऊर्जा सुरक्षा होर्मुज स्ट्रेट पर काफी हद तक निर्भर है:
- कच्चे तेल आयात का लगभग 40-50% हिस्सा इसी रास्ते से आता है।
- एलपीजी (रसोई गैस) का 60-85% और LNG का बड़ा हिस्सा भी इसी मार्ग से गुजरता है।
- तत्काल (शॉर्ट टर्म) में भारत के पास 10-15 दिनों (कुछ रिपोर्टों में 74 दिनों तक) का कच्चा तेल और ईंधन भंडार उपलब्ध है, इसलिए आपूर्ति में बड़ा व्यवधान नहीं है।
- सरकार का प्लान बी तैयार है: रूस से तेल आयात बढ़ाना (जो पहले से मजबूत संबंध हैं), अमेरिका, अफ्रीका और अन्य स्रोतों से विविधीकरण। इससे निकट भविष्य में संकट टल सकता है।
लेकिन अगर बंदी लंबी खिंची तो:
- तेल कीमतों में उछाल से पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं (कुछ चिंताओं में ₹200 पार की बातें भी चल रही हैं, हालांकि यह अतिशयोक्ति हो सकती है)।
- आयात बिल में अरबों डॉलर का बोझ बढ़ेगा → चालू खाता घाटा बढ़ेगा → रुपया कमजोर हो सकता है।
- महंगाई (इन्फ्लेशन) बढ़ेगी, परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा की चीजों की लागत बढ़ेगी।
- अर्थव्यवस्था पर बड़ा झटका लग सकता है, खासकर अगर वैश्विक मंदी का डर बढ़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने पिछले वर्षों में तेल स्रोतों का विविधीकरण किया है, इसलिए फिलहाल बड़ा संकट नहीं है, लेकिन कीमतों में वृद्धि से आम आदमी को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर कड़ी नजर रख रही हैं।
सलाह: आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है। जरूरत अनुसार वाहन उपयोग और खर्च की प्लानिंग करें। स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए समाचारों पर नजर रखें।






