शुद्ध और मिलावटी मिलाकर सरसों तेल की मंडल में प्रतिदिन 15 टन की खपत है। सूत्रों के मुताबिक, शहर के हार्बर्ट बंधे के पास के इलाकों में आज भी कुछ ऐसे धंधेबाज हैं जो सरसों का मिलावटी तेल बनाकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
इन्हें पुलिस का भी कोई डर नहीं है। इनमें से कुछ की तो सेटिंग है, जिनकी नहीं है, वे कार्रवाई की जद में आते हैं।होली को देखते हुए सरसों तेल में मिलावट करने वाले धंधेबाज जिले व आसपास सक्रिय हो गए हैं। धंधेबाज नेपाल से पाम ऑयल 80 रुपये में ला रहे हैं और उसमें केमिकल और एसेंस मिलाकर सरसों का मिलावटी तेल तैयार कर उसे 150 से 160 रुपये में बेच रहे हैं। पीले रंग व सरसों के तेल का सुगंध देने वाले केमिकल के इस्तेमाल से मिलावटी तेल एकदम असली जैसा नजर आता है। धंधेबाज रोजाना मंडल में पांच टन मिलावटी तेल खपा रहे हैं।
जयपुर में सरसों के तेल की मिलावट का खेल जारी, लोगों की सेहत से खिलवाड़
जयपुर, 26 फरवरी 2026: शहर की मंडियों में शुद्ध और मिलावटी सरसों का तेल मिलाकर प्रतिदिन करीब 15 टन की खपत हो रही है। सूत्रों की मानें तो हार्बर्ट बंधे (Herbert Bhande) के आसपास के इलाकों में आज भी कुछ धंधेबाज खुले आम मिलावटी सरसों का तेल तैयार कर बाजार में बेच रहे हैं, जिससे आम लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
ये मिलावटखोर सरसों के तेल में सस्ते तेल जैसे पाम ऑयल, राइस ब्रान ऑयल या अन्य रसायनों को मिलाकर नकली सरसों का तेल बनाते हैं, जो लंबे समय तक सेवन करने से हृदय रोग, कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। सूत्रों के अनुसार, इनमें से कुछ बड़े धंधेबाजों की पुलिस और स्थानीय प्रशासन से कथित सेटिंग बताई जा रही है, जिसके चलते वे बेखौफ होकर यह गैरकानूनी धंधा चला रहे हैं। वहीं, जिनकी कोई सेटिंग नहीं है, वे समय-समय पर खाद्य सुरक्षा विभाग या पुलिस की कार्रवाई के दायरे में आ जाते हैं।
हाल के महीनों में जयपुर के विभिन्न इलाकों जैसे चाकसू, मुहाना, झोटवाड़ा आदि में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने “शुद्ध आहार मिलावट पर वार” अभियान के तहत बड़ी-बड़ी कार्रवाइयां की हैं। उदाहरण के तौर पर चाकसू में 1155 किलो मिलावटी सरसों का तेल जब्त किया गया, जबकि अन्य स्थानों पर हजारों लीटर संदिग्ध तेल सीज हो चुका है। त्योहारों के सीजन में यह समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि तेल की मांग बढ़ने से मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि खुले में बिकने वाला सस्ता सरसों का तेल (135-155 रुपये प्रति किलो) आकर्षक लगता है, लेकिन ब्रांडेड पैकेट वाले तेल (172-225 रुपये प्रति किलो) की तुलना में इसमें मिलावट का खतरा अधिक रहता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग हमेशा FSSAI प्रमाणित, पैकेट बंद और ब्रांडेड तेल ही खरीदें। खुले तेल की गुणवत्ता जांचना मुश्किल होता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
प्रशासन से मांग की जा रही है कि हार्बर्ट बंधे जैसे संवेदनशील इलाकों में नियमित छापेमारी बढ़ाई जाए और मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो, ताकि आमजन की सेहत सुरक्षित रहे। फिलहाल जांच एजेंसियां इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं।






