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February 26, 2026 2:26 pm

इसराइल को मान्यता देने वाले पीएम मोदी के बयान पर कांग्रेस ने ये कहा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे के दौरान बुधवार (25 फरवरी 2026) को इसराइली संसद नेसेट को दिए गए ऐतिहासिक संबोधन पर अब कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में भारत-इजरायल संबंधों को मजबूत बताते हुए एक व्यक्तिगत संयोग का जिक्र किया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था—ठीक उसी दिन भारत ने इजरायल को औपचारिक मान्यता दी थी। उन्होंने कहा, “मैं इस भूमि से हमेशा जुड़ा महसूस करता रहा हूं। आखिरकार, मैं उसी दिन पैदा हुआ था जब भारत ने इजरायल को औपचारिक रूप से मान्यता दी—17 सितंबर 1950!”

इस बयान को कांग्रेस ने इतिहास के संदर्भ में चुनौती देते हुए जवाब दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पीएम मोदी के नेसेट संबोधन में अपने मेजबान का खुला बचाव था। उन्होंने यह बात उठाई कि भारत ने इजरायल को उसी दिन मान्यता दी जिस दिन उनका जन्म हुआ।”

रमेश ने आगे लिखा, “वास्तव में, 13 जून 1947 को अल्बर्ट आइंस्टीन ने इजरायल की स्थापना के विषय पर जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिखा था। एक महीने बाद नेहरू ने आइंस्टीन को उसका उत्तर दिया। 5 नवंबर 1949 को दोनों की मुलाकात प्रिंसटन में आइंस्टीन के घर पर हुई थी।”

उन्होंने नेहरू-आइंस्टीन संबंधों का विस्तार से जिक्र करते हुए कहा, “नवंबर 1952 में आइंस्टीन को इजरायल के राष्ट्रपति पद का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया। अप्रैल 1955 में उनके निधन से कुछ समय पहले, आइंस्टीन और नेहरू के बीच परमाणु विस्फोटों और हथियारों के मुद्दे पर पत्रों का आदान-प्रदान भी हुआ था।”

जयराम रमेश ने नेहरू के 11 जुलाई 1947 के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि नेहरू ने यहूदियों के प्रति सहानुभूति जताई थी, लेकिन फिलिस्तीन के अरबों की स्थिति पर भी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि नेहरू ने दोनों पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कोई एकतरफा समाधान नहीं थोपने की बात कही थी। कांग्रेस का यह जवाब पीएम मोदी के भाषण को “एकतरफा” और “मेजबान का बचाव” बताते हुए ऐतिहासिक संतुलन पर जोर देता है।

यह विवाद भारत-इजरायल संबंधों के इतिहास पर नई बहस छेड़ रहा है। भारत ने 17 सितंबर 1950 को इजरायल को मान्यता दी थी, लेकिन पूर्ण राजनयिक संबंध 1992 में ही स्थापित हुए। पीएम मोदी का नेसेट संबोधन पहला ऐसा मौका था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजरायली संसद को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई और इजरायल के साथ अटूट एकजुटता जताई।

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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