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February 19, 2026 4:55 pm

राजस्थानः मेवाड़ यूनिवर्सिटी में जम्मू-कश्मीर के 30 स्टूडेंट्स से ‘धोखाधड़ी’, इंसाफ़ मांगने पर सस्पेंड

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चित्तौड़गढ़/जयपुर: राजस्थान की ऐतिहासिक नगरी चित्तौड़गढ़ के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी एक गंभीर विवाद में फंस गई है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बीएससी नर्सिंग के फाइनल ईयर के 33 छात्रों (जिनमें 30 जम्मू-कश्मीर के हैं) को सस्पेंड कर दिया है। ये छात्र भारतीय सेना की सद्भावना योजना (Goodwill Scheme) के तहत राजस्थान में पढ़ने आए थे और उनका चार साल का कोर्स अब पूरा होने वाला है।

मुख्य मुद्दा क्या है? छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने उनके बीएससी नर्सिंग कोर्स के लिए राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से आवश्यक मान्यता नहीं ली है। बिना इन मान्यताओं के उनकी डिग्री अमान्य हो सकती है, जिससे प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन, नौकरी और आगे की पढ़ाई पर खतरा मंडरा रहा है। पिछले तीन साल से छात्र इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी केवल आश्वासन दे रही है या सस्पेंड कर रही है।

क्या हुआ हाल ही में?

  • 16 फरवरी 2026 को छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल जयपुर पहुंचा और उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा तथा आरएनसी रजिस्ट्रार जोईस कुरियन से मुलाकात की, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
  • एक कश्मीरी छात्र आदिल ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “हमें जयपुर से भी निराशा मिली है। यूनिवर्सिटी की गलती की सजा हम भुगत रहे हैं और कोई सुनवाई नहीं हो रही।”
  • प्रदर्शन के दौरान छात्र धरने पर बैठ गए, जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। कुछ रिपोर्ट्स में छात्रों पर हमले और मारपीट की भी शिकायतें आई हैं।
  • जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने मामले को गंभीर बताया और जम्मू-कश्मीर CM ओमर अब्दुल्ला तथा राजस्थान CM भजन लाल शर्मा से हस्तक्षेप की मांग की है। JKSA का कहना है कि 50 से ज्यादा कश्मीरी छात्र प्रभावित हैं।

पिछले वादे और वर्तमान स्थिति 2024 में इसी मुद्दे पर कोर्ट में यूनिवर्सिटी ने लिखित आश्वासन दिया था कि अगर मान्यता नहीं मिली तो छात्रों को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में ट्रांसफर किया जाएगा, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। छात्रों का प्रैक्टिकल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर में होना था, लेकिन अब सब कुछ अनिश्चित है।

यह मामला न केवल छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि सेना की सद्भावना योजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठा रहा है। विभागीय जांच और उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है। क्या इन छात्रों को न्याय मिलेगा? स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं।

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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