Explore

Search

February 16, 2026 9:02 pm

‘रूस से तेल नहीं खरीदेगा भारत’, मार्को रुबियो के दावे पर जर्मनी में एस जयशंकर का जवाब, कहा- हम बाहरी दबाव…

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

नई दिल्ली/म्यूनिख, 16 फरवरी 2026: भारत-अमेरिका ट्रेड डील में रूस से अतिरिक्त तेल न खरीदने का आश्वासन? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा दावा किया है कि भारत ने अमेरिका को आश्वासन दिया है कि वह रूस से अतिरिक्त कच्चा तेल नहीं खरीदेगा। यह बयान म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में दिया गया, जहां रुबियो ने कहा, “भारत के साथ हमारी बातचीत में हमें उनका आश्वासन मिला है कि वे अतिरिक्त रूसी तेल खरीदना बंद कर देंगे।”

रुबियो का यह दावा हाल ही में घोषित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के संदर्भ में आया है, जिसमें अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त टैरिफ (25% से 50% तक) को घटाकर 18% कर दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डील की घोषणा के दौरान भी दावा किया था कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और अमेरिकी तेल ज्यादा खरीदेगा।

एस जयशंकर का स्पष्ट जवाब: रणनीतिक स्वायत्तता अटल

इस दावे पर भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने म्यूनिख कॉन्फ्रेंस में ही जवाब दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) के प्रति प्रतिबद्ध है और ऊर्जा खरीद के फैसले राष्ट्रीय हित, उपलब्धता, लागत और जोखिम के आधार पर लिए जाते हैं। जयशंकर ने कहा, “हम रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति बहुत मजबूती से प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि यह हमारी इतिहास और विकास का हिस्सा है।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर सवाल यह है कि क्या हम स्वतंत्र रूप से फैसले ले सकते हैं, जो कभी-कभी पश्चिमी विचारधारा से मेल न खाएं… तो हां, ऐसा हो सकता है।” जयशंकर ने स्पष्ट किया कि वैश्विक तेल बाजार जटिल और गतिशील है, और तेल कंपनियां ही व्यावसायिक आधार पर फैसले लेती हैं। भारत ने बार-बार दोहराया है कि ऊर्जा खरीद में “राष्ट्रीय हित” ही मार्गदर्शक सिद्धांत रहेगा।

क्या है वास्तविक स्थिति?

  • रुबियो ने बार-बार “अतिरिक्त” (additional) शब्द का इस्तेमाल किया, जिससे साफ है कि मौजूदा अनुबंध या वर्तमान स्तर पर खरीद प्रभावित नहीं होगी – सिर्फ भविष्य में वॉल्यूम बढ़ाने पर रोक का आश्वासन।
  • भारत ने 2022 के बाद से रूस से सस्ता तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत की है, लेकिन हाल के महीनों में आयात में कमी आई है (तीन साल के निचले स्तर पर)।
  • अमेरिका की नई सैंक्शंस और ट्रेड डील के बाद भारत ने यूएस और अन्य स्रोतों से तेल आयात बढ़ाया है, लेकिन रूस से पूरी तरह अलग होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
  • रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी ऐसे किसी आश्वासन को खारिज किया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है – अमेरिका को रूस पर दबाव बढ़ाने में मदद मिली, जबकि भारत को टैरिफ राहत मिली। लेकिन भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और बहुपक्षीय नीति अटल बनी हुई है। जयशंकर के शब्दों में, “साझेदारियां विकसित हो सकती हैं, लेकिन नीतिगत फैसले संप्रभु रहेंगे।”

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर