वाराणसी, 16 फरवरी 2026: अंतश्चेतना शिव और ब्रह्मांडीय ऊर्जा आदिशक्ति के मिलन का महापर्व महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर रविवार (15 फरवरी 2026) को पूरी काशी उत्सव के उल्लास में मगन रही। काशीपुराधिपति बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ और मां गौरा के परिणयोत्सव (विवाह उत्सव) को लेकर हर ओर आस्था की लहरें उफान पर थीं। पूरा शहर शिवमय हो उठा, हर घर काशी-कैलाश बन गया और हर मन में शिव-गौरा का वास रहा।
काशी में शिव-गौरा विवाह का भव्य उत्सव
इस पावन अवसर पर हर परिवार खुद घराती तो खुद ही बराती बन गया। पुरुष बाबा विश्वनाथ की बरात में शामिल हुए, जबकि महिलाएं व्रत-उपवास रखकर कन्या पक्ष की भूमिका में खड़ी दिखीं। बाबा के विवाह में नगरवासी पूरी रात जागरण करते रहे। आस्था का मुख्य केंद्र श्रीकाशी विश्वनाथ धाम रहा, जहां लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
महापर्व पर पारंपरिक शयन आरती नहीं हुई। इसके स्थान पर सामवेद के मंत्रों पर चार पहर की विशेष आरतियां हुईं। इनके बीच विवाह के सभी लोकाचार और रीति-रिवाज निभाए गए, जिससे पूरा मंदिर परिसर दिव्य ऊर्जा से भर गया।
लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब, शाम 6 बजे तक 5.45 लाख दर्शन
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, शाम 6 बजे तक 5.45 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। पूरे दिन और रात कतारें 5 किमी तक लंबी रहीं। मंदिर प्रशासन ने पुष्प वर्षा, ड्रोन निगरानी और 2500+ पुलिस बल के साथ कड़ी व्यवस्था की। अनुमान है कि कुल मिलाकर 10-15 लाख या इससे अधिक भक्त महाशिवरात्रि पर काशी पहुंचे।
विशेष पूजा और व्यवस्था
- मंगला आरती तड़के 2:15 बजे से शुरू हुई, जिसके बाद दर्शन खुल गए।
- चारों प्रहर पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में भक्त शामिल हुए।
- गंगा स्नान के बाद भक्त सीधे बाबा के दरबार पहुंचे।
- पूरे शहर में शिव भजन, कीर्तन और जागरण का माहौल रहा।
यह महाशिवरात्रि काशी के लिए ऐतिहासिक रही, जहां शिव-पार्वती के मिलन की खुशी में पूरी नगरी एक साथ नाच-गाकर झूम उठी। हर हर महादेव के जयकारों से गूंजती काशी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आस्था की ताकत से बड़ा कुछ नहीं। भक्तों का कहना है कि बाबा के दर्शन से जीवन में शांति और सुख मिला। जय भोलेनाथ! जय मां गौरी!






